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TV एंकर की भूमिका महत्वपूर्ण, अभद्र भाषा समाज को बना रही जहरीला-SC


नई दिल्ली, 20 सितंबर 2022 : टीवी चैनलों पर ग्रुपडिस्‍कशन केदौरान हेट स्‍पीच केप्रयोग पर सुप्रीमकोर्ट ने गंभीरचिंता व्‍यक्‍त कीहै। सुप्रीम कोर्टने बुधवार कोटीवी एंकरों कीभूमिका सहित विजुअलमीडिया के माध्यमसे हेट स्‍पीच कीकड़ी आलोचना की।शीर्ष कोर्ट नेइस बात परजोर दिया कियह हमारे समाजके ताने-बानेको जहरीला बनारहा है। इसतरह के भाषणोंपर अंकुश लगानेमें सरकार कीमूकदर्शक भूमिका पर सवालउठाया गया है।

हेट स्‍पीच कोलेकर टीवी चैनलोंकी खिंचाई

जस्टिस केएम जोसेफऔर हृषिकेश रायने कहा किएक टीवी बहसके दौरान एंकरकी भूमिका बहुतमहत्वपूर्ण है। पीठने हेट स्‍पीच परटीवी चैनलों कीखिंचाई की औरबताया कि एकशो के दौरानयह देखना एंकरका कर्तव्य हैकि प्रसारण केदौरान हेट स्‍पीच का उपयोगनहीं किया जाए।जस्टिस जोसेफ ने कहाकि हमारा देशकिस दिशा मेंजा रहा है? अभद्र भाषा सेसमाज के ताने-बाने काजहरीला बनाया जा रहाहै... इसकी इजाजतनहीं दी जासकती। पीठ नेअभद्र भाषा केमुद्दे पर केंद्रके वकील कीभी खिंचाई की।

सरकार को हेटस्‍पीच पररोक लगाने केलिए करनी होगीव्‍यवस्‍था

उन्होंने कहा किइस मुद्दे परसरकार चुप क्योंखड़ी है। यहसब क्यों होरहा है? लोगआएंगे और जाएंगेलेकिन देश कोसहना होगा। पीठने सुझाव दियाकि टीवी परशो का संचालनकरने के लिएएक व्यवस्था होनीचाहिए और इसकेलिए कुछ पद्धतिहोनी चाहिए। एंकरको लोगों कोनीचा नहीं दिखानाचाहिए। जस्टिस जोसेफ नेकहा कि आपएक व्यक्ति कोनीचे गिराते हैं।बस देखें किवह व्यक्ति क्यामहसूस करता है।आप किसी कादैनिक आधार परउपहास करते हैं, यह धीरे-धीरेकिसी की हत्याकरने जैसा है।

हेट स्‍पीच केमुद्दे को तुच्छमामला नहीं मानना ​​चाहिए

उन्होंने आगे कहाकि मुख्यधारा केमीडिया या सोशलमीडिया पर येभाषण अनियमित तौरदिखाई दे रहेहैं। मीडिया मेंएंकर की भूमिकामहत्वपूर्ण है। उसकायह देखना काकर्तव्य है किबहस में अभद्रभाषा का प्रयोगन हो। पीठने केंद्र केवकील से कहाकि केंद्र सरकारको हेट स्‍पीच केमुद्दे को तुच्छमामला नहीं मानना ​​चाहिए और इसेरोकने के लिएसरकार को विकासशीलतंत्र का नेतृत्वकरना चाहिए।

पीठ नेउत्तराखंड सरकार से पूछा, धर्म संसद परक्‍या कार्रवाईकी

पीठ नेउत्तराखंड सरकार के वकीलसे भी सवालकिया कि जबधर्म संसद (होरही थी), तोआपने क्या कार्रवाईकी। क्या आपनेइसे रोकने कीकोशिश की? इसबात पर जोरदेते हुए किकोई भी धर्महिंसा का प्रचारनहीं करता है।वकील ने जवाबदिया कि हमनेरोकने के लिएकदम उठाए। कार्रवाईकी।

प्रेस की स्वतंत्रतामहत्वपूर्ण, लेकिन खींचनी होगीलक्ष्‍मण रेखा

केंद्र का प्रतिनिधित्वकर रहे अतिरिक्तसॉलिसिटर जनरल केएमनटराज ने पीठको सूचित कियाकि अभद्र भाषाके खिलाफ कीगई कार्रवाई पर 14 राज्य सरकारों ने जवाबदिया है। पीठने कहा किप्रेस की स्वतंत्रतामहत्वपूर्ण है, लेकिनहमें पता होनाचाहिए कि कहांलक्ष्‍मण रेखाखींची जानी है।इसमें आगे कहागया है किहेट स्‍पीचकी परत चढ़ीहुई है औरयह किसी कीहत्या करने जैसाहै। टीवी चैनलइसके जरिये लोगोंको अपनी ओरआकर्षित करते हैं।

विधि आयोगकी सिफारिशों परकार्रवाई करे सरकार

इसमें आगे कहागया है किनफरत के माहौलमें बंधुत्व कीभावना नहीं होसकती। इसने कहाकि सरकार कोप्रतिकूल रुख नहींअपनाना चाहिए बल्कि अदालतकी मदद करनीचाहिए। मामले की आगेकी सुनवाई नवंबरमें होगी। इसनेकेंद्र से यहस्पष्ट करने केलिए भी कहाकि क्या वहघृणास्पद भाषण पररोक लगाने केलिए विधि आयोगकी सिफारिशों परकार्रवाई करना चाहताहै। शीर्ष अदालतहेट स्‍पीचके संबंध मेंयाचिकाओं पर सुनवाईकर रही थी।

कोर्ट ने गाइडलाइनविकसित करने केदिए संकेत

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायद्वारा दायर याचिकाओंमें से एकने केंद्र कोजांच के लिएनिर्देश देने कीमांग की। इसमेंअंतरराष्ट्रीय कानूनों, देश मेंअभद्र भाषा औरअफवाह फैलाने वालोंको नियंत्रित करनेके लिए प्रभावीऔर कड़े कदमउठाएं। पीठ नेकुछ गाइडलाइन विकसितकरने का भीसंकेत दिया क्योंकिदेश में हेटस्‍पीच कोलेकर कोई कानूननहीं है। 21 जुलाईको, सुप्रीम कोर्टने गुरुवार कोकेंद्रीय गृह सचिवको मॉब लिंचिंगऔर हेट स्‍पीच जैसीस्थितियों पर अंकुशलगाने के लिएनिवारक और इसेदुरुस्‍त करनेजैसे उपायों केसंबंध में इसकेद्वारा पहले दिएगए निर्देशों केपालन के संबंधमें राज्य सरकारोंसे जानकारी इकट्ठाकरने के लिएकहा।

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