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केंद्रीय राज्यमंत्री के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज, जानिए क्या है पूरा मामला


आगरा, 14 फरवरी 2022 : केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल के जाति प्रमाण पत्र का मामला चुनाव के समय एक बार फिर सामने आ गया है। उनके खिलाफ विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एससी-एसटी कोर्ट की अदालत में अधिवक्ता सुरेश चंद्र सोनी ने प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर अदालत ने प्रकीर्ण वाद दर्ज कर सुनवाई के लिए 18 फरवरी को पत्रावली तलब की है।

अधिवक्ता सुरेश चंद्र सोनी ने अदालत में प्रार्थना पत्र में कहा है कि मैनपुरी के करहल विधान सभा क्षेत्र से भाजपा ने इस बार केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल को प्रत्याशी बनाया है। प्रो. एसपी सिंह बघेल ने विधान सभा चुनाव लड़ने को जो नामांकन प्रस्तुत किया है। अधिवक्ता ने मैनपुरी के जिलाधिकारी और रिटर्निंग आफिसर के समक्ष केंद्रीय राज्यमंत्री के दस्तावेज प्रस्तुत करके आरोप लगाया कि प्रो. एसपी सिंह बघेल के मध्यप्रदेश से जारी शैक्षिक प्रमाण पत्रों पर उनकी जाति ठाकुर दर्ज है। उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग में पिछड़ी जाति के रूप में नौकरी प्राप्त की। जलेसर लोक सभा क्षेत्र से 1998 में उन्होंने बघेल जाति के रूप में नामांकन किया।

वर्ष 2017 में विधान सभा चुनाव में टूंडला विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के दौरान उन्होंने अनुसूचित जाति धनगर का जाति प्रमाण पत्र नामांकन के दौरान प्रस्तुत किया। इसके बाद आगरा लोक सभा क्षेत्र से चुनाव के दौरान भी नामांकन में उन्होंने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। अधिवक्ता ने इसको लेकर तब आपत्ति जताई थी। 11 फरवरी को अधिवक्ता सुरेश चंद्र सोनी ने अदालत में धोखाधड़ी, कूटरचना और एससी-एसटी एक्ट के तहत परिवाद दर्ज कराने को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। अदालत ने इस पर प्रकीर्ण वाद दर्ज करते हुए पत्रावली पर सुनवाई के लिए 18 फरवरी नियत की है।

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