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यूपी के सभी मेडिकल कालेजों में होगी नर्सिंग की पढ़ाई, सरकार ने तैयार की रूपरेखा


लखनऊ, 26 सितंबर 2022 : उत्‍तर प्रदेशके सभी मेडिकलकालेजों में अबनर्सिंग की पढ़ाईहोगी। पांच सालके भीतर प्रदेशके सभी मेडिकलकालेजों नर्सिंग कालेज खोलेजाएंगे। यह घोषणाउप मुख्यमंत्री ब्रजेशपाठक ने की।बस्‍ती मेंआयोजित एक कार्यक्रममें डिप्‍टीसीएम ने कहाकि अगले पांचसाल में प्रदेशके सभी मेडिकलकालेज में नर्सिंगकालेज खोलने रूपरेखा तैयार होचुकी है। अस्पतालके लिए जितनामहत्वपूर्ण डाक्टर हैं, उतनाही नर्सिंग औरपैरामेडिकल स्टाफ।

पीपीपी माडल परखुलेंगे मेडिकल कालेज

डाक्टरों की कमीदूर करने केलिए हरेक जिलेमें मेडिकल खोलेजा रहे हैं।वर्ष 2016 तक जहांउत्तर प्रदेश मेंमहज 13 मेडिकल कालेज थे।वहीं अब इनकीसंख्या बढ़कर 35 हो गईहै। इसके अलावा 30 निजी मेडिकल कालेज भीखुल चुके हैं। 14 जिलों को छोड़करअन्य सभी जिलोंमें मेडिकल कालेजखोलने की प्रक्रियाशुरू हो चुकीहै। छह जिलोंमें पीपीपी माडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) परमेडिकल कालेज खोले जाएंगे।इसके लिए सरकार 150 करोड़ की सब्सिडीदेगी।

सरकारी अस्‍पतालोंपर बढ़ा लोगोंका विश्वास

उन्‍होंनेकहा कि शहरसे लेकर गांवतक के अस्पतालोंमें डाक्टरों औरदवाओं की कमीका मुद्दा समाप्तहो गया है।पहले दवा समाप्तहोने के बादइसकी डिमांड कीजाती थी लेकिनअब उससे पहलेही अस्पताल मेंदवा पहुंच जारही है। हरेकजगह एक सप्ताहकी दवा काभंडारण अनिवार्य कर दियागया है। बदलावकी ही देनहै सरकारी अस्पतालोंके प्रति लोगोंका विश्वास बढ़रहा है। प्रदेशके सरकारी अस्पतालोंमें प्रतिदिन एकलाख सत्तर हजारसे अधिक मरीजइलाज के लिएपहुंचते हैं।

हाईवे से जुड़ेजिलों में ट्रामासेंटर को प्रभावीबनाया जाएगा

इनमें से बारहहजार मरीज सड़कएवं अन्य हादसोंमें घायल होकरआते हैं जबकिआठ हजार मरीजलीवर,किडनी औरहर्ट जैसे गंभीररोगों से पीड़ितहोते हैं। हररोज सरकारी अस्पतालोंमें पांच हजारमरीजों का आपरेशनकिया जा रहाहै। मरीजों कोबेहतर चिकित्सकीय सुविधाउपलब्ध कराने के लिएआंकड़ों की निरंतरमानीटरिंग की जारही है, जहांजिस रोग मरीजज्यादा आ रहेहैं, वहां केअस्पतालों में उसकेअनुरूप व्यवस्था भी दुरूस्तकी जा रहीहै। हाईवे सेजुड़े जिलों मेंट्रामा सेंटर को प्रभावीबनाया जाएगा। इसदिशा में तेजीसे प्रयास किएजा रहे हैं।कहा कि पूर्वकी सरकार नेकागजों में ट्रामासेंटर तो खोलदिए लेकिन नडाक्टरों की तैनातीकी और नही इंफ्रास्ट्रक्चर विकसितकिए। हमने इसेचुनौती के रूपमें लिया है।वर्ष 2017 के पहलेप्रदेश में महज 13 मेडिकल कालेज और इनमेंसिर्फ 1790 नीट उत्तीर्णछात्र ही प्रवेशले पाते थे।वर्तमान में इनकीसंख्या बढ़कर 35 हो गईहै। ऐसे मेंयह सीटें बढ़करतीन गुनी होगई है। इससेआने वाले समयमें प्रदेश मेंडाक्टरों की कमीदूर हो जाएगी।

गांव मेंही मिल रहीहै चिकित्सा सुविधा

मरीजों को पहलेबदन दर्द, पेटदर्द, उल्टी, बुखारऔर खांसी केइलाज के लिएदूर जाना पड़ताथा। 25 हजार उपकेंद्रऔर 15 हजार हेल्थवेलनेस सेंटर संचालित करसरकार ने एकबड़ा काम कियाहै। इन सेंटरोंपर एएनएम औरकम्युनिटी हेल्थ अफसर कार्यरततो हैं हीदवाओं की भीकोई कमी नहींहै। इन सेंटरोंपर कोई गंभीरमरीज पहुंचता हैतो संजीवनी एपके जरिए वोविशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्ककर जरूरी परामर्शले सकते हैं।

लोकल पर्चेजमें वीआईपी कल्चरखत्म

उप मुख्यमंत्रीने कहा किपहले अस्पतालों मेंदवाओं के लोकलपर्चेज का लाभवीआईपी और प्रभावशालीलोग ही लेपाते थे। यहव्यवस्था बदल दीगई है। अबइसका लाभ केवलगरीब लाेग पाएंगे।दवा के लिएकोई गरीब परेशानन हो,इसकेलिए दवा खरीदका 20 प्रतिशित बजटजिलों को देदिया गया है।इस बारे मेंसीएमएस और सीएमओको निर्देश भीजारी कर दिएगए हैं।

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