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एक करोड़ हर महीने कमाने वाले विकास दुबे के एकाउंट खाली, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला



माफिया विकास दुबे एनकाउंटर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन के संकेत दिए हैं। हैदराबाद एनकाउंटर मामले की तरह ही कमेटी गठित हो सकती है।सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी। यूपी सरकार विकास दुबे एनकाउंटर मामले में अब तक उठाये गए कदमों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने भी अर्जी दाखिल करके यूपी सरकार को प्रतिवादी बनाया था। अर्जी में पुलिस और अपराधी-राजनेताओं के बीच गठजोड़ की जांच सीबीआई या एनआईए से कराने की मांग की गई है।


बिकरू कांड में फरार अपराधी 50 हजार के इनामी शशिकांत उर्फ सोनू पांडेय को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर वारदात में लूटी गई इंसास व एके 47 रायफल और कारतूस बरामद किए गए। शशिकांत के पिता प्रेमकुमार पांडेय को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि लूटी गई रायफलें शशिकांत ने ही विकास के घर और अपने घर मे छिपाई थीं। एडीजी ने बताया कि विकास दुबे के घर से सर्च के दौरान पुलिस से लूटी गई एक- 47, रायफल, 17 कारतूस और शशिकांत के घर से इंसास रायफल और 20 कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार किए गए शशिकांत ने बताया कि वारदात वाले दिन 25 से 30 लोग मौजूद थे और सीओ देवेंद्र मिश्रा को अमर ने मारा था।

इस बीच खबर है कि उत्तर प्रदेश एसटीएफ के हाथों दस जुलाई को मारे गए कुख्यात विकास दुबे के खिलाफ शिकायत करने वाले राहुल तिवारी बीते 12 दिन से लापता है। राहुल तिवारी ने ही विकास दुबे के खिलाफ चौबेपुर थाना में 30 जून को रिपोर्ट लिखाई थी। एफआईआर की जानकारी होने पर ही विकास दुबे ने उसको अपने गांव बुलाया था और तत्कालीन थाना प्रभारी चौबेपुर विनय तिवारी के सामने ही पीटा था। विकास ने बीच-बचाव करने पर विनय तिवारी से भी झड़प की थी। राहुल तिवारी की एफआइआर पर ही कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गांव में दो-तीन जुलाई की रात पुलिस ने विकास दुबे को पकडऩे के लिए दबिश दी थी।

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खातों से भी बहुत ज्यादा रकम का खुलासा नहीं हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जांच एजेंसियों के सामने यही खड़ा हो गया है कि आखिर हर महीने एक करोड़ की उगाही करने वाले विकास की रकम कहां गई। यही वजह है कि प्रवर्तन निदेशालय ने विकास के अलावा उसके खास गुर्गों के खातों और पैसों के लेन-देन को सघन जांच शुरू कर दी है। अभी तक की जांच में एजेंसियों को जो सूत्र मिले हैं, उसके मुताबिक विकास की हर महीने की कमाई 90 लाख से 1.20 करोड़ रुपए थी।


टीम स्टेट टुडे



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