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विकास दुबे पर रहा है इन नेताओं का हाथ



विकास दुबे एक खूंखार हिस्ट्रीशीटर है। जिसके ऊपर 60 मुक़दमे दर्ज हैं। फिर भी वो जेल की सलाखों के बाहर था। इसने कानपुर में ऐसा जघन्य हत्याकांड अंजाम देकर पूरी योगी सरकार को हिला दिया।। सियासी बेल पकड़कर ये अपराधी जरायम की दुनिया की सीढियाँ चढ़ता चला गया


कानपुर देहात में बिकरू गाँव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे विकास दुबे के माफिया बनने की कहानी भी राजनीति के अपराधीकरण की ही देन है। विधायकों सांसदों मंत्रियों और पुलिस के बड़े बड़े अफसरों की सरपरस्ती का ही नतीजा है आज विकास दुबे आतंक का पर्याय बन बैठा। विकास के आपराधिक कैरियर की शुरुआत 1990 से हुई तब विकास की मदद पूर्व विधायक नेकचंद पांडे ने की।

फिर विकास भाजपा नेता हरिकृष्ण श्रीवास्तव के हाथों की कठपुतली बन गया सांसद श्याम बिहारी मिश्र के सम्पर्क में भी विकास आया था। श्याम बिहारी 96 में बसपा में गए तो विकास भी बसपा का सदस्य बन बैठा। बस यही से कुख्यात अपराधी विकास दुबे जरायम की दुनिया का सितारा बनकर उभरा। 11 नवंबर 2001 को विकास ने कानपुर के थाना शिवली के अंदर घुसकर संतोष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अपने आतंक और सियासी रसूख के बूते विकास जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी भी हथियाने में कामयाब हो गया। तीन गाँवों में उसने अपने घरवालों को प्रधान बनवा दिया।

बसपा सरकार आते ही विकास ने आत्मसम्पर्ण कर दिया था। विकास तो खुल्लमखुला यहाँ तक कहता था बसपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री मायावती उससे कभी नाराज नहीं हो सकती। बसपा भाजपा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी उत्तरप्रदेश की चारों प्रमुख पार्टियों के कद्दावर नेताओं से दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की गहरी नजदीकियां रही हैं। एसटीएफ ने कानपुर में भाजपा के तत्कालीन दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने के अंदर सनसनीखेज हत्या करने केआरोपी विकास दुबे को 2017 में लखनऊ से गिरफ्तार किया था।

लेकिन वो फिर बाहर आ गया। नतीज़तन आज यूपी पुलिस अपने आठ जाबांज जवानों को खो चुकी है। सियासत ने ही उत्तरप्रदेश में ऐसे दुर्दांत अपराधियों को हमेशा से पैदा किया है।


टीम स्टेट टुडे



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