क्या होती है आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट, जानिए इसका महत्व और कौन कैसे तैयार करता है



भारत में पेश होने वाले बजट की प्रक्रिया में संसद के पटल पर बजट सत्र के पहले दिन आर्थिक सर्वेक्षण या समीक्षा रिपोर्ट रखी जाती है।


वित्तीय वर्ष 2020-21 की आर्थिक समीक्षा (Economic Survey 2020-21) संसद के पटल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 जनवरी को पेश की। हर साल केंद्रीय बजट पेश किए जाने से पहले आर्थिक समीक्षा पेश की जाती है। देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इस दस्तावेज में देश की इकोनॉमी के ब्रॉड प्रोस्पेक्ट, राजकोष, महंगाई दर और सभी तरह की आर्थिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से सारी जानकारी उपलब्ध करायी जाती है।


आज स्टेट टुडे आपको बताएगा कि ये आर्थिक सर्वेक्षण कौन तैयार करता है है। इसका महत्व क्या है और ये कैसे तैयार होता है।


क्या होती है आर्थिक समीक्षा


आर्थिक सर्वेक्षण में पिछले एक साल में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट शामिल होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख चुनौतियों और उनसे निपटने का जिक्र होता है। आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में इस दस्तावेज को तैयार किया जाता है।


जब एक बार दस्तावेज तैयार हो जाता है तो उसे वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है। पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में पेश किया गया था। बजट के समय ही इस दस्तावेज को पेश किया जाता है। पिछले कुछ सालों में आर्थिक सर्वेक्षण को दो खंडों में प्रस्तुत किया जाने लगा है।


वॉल्यूम 1 को भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के अनुसंधान और विश्लेषण कर केंद्रित किया गया था। जबकि वॉल्यूम 2 में वित्तीय वर्ष की एक विस्तृत रिपोर्ट को पेश किया गया था, जो अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती है।


आम तौर पर हम सभी नए वर्ष का बजट तैयार करने से पहले जाते हुए साल की अपनी सभी आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा करते हैं। अपनी सेविंग्स पर गौर करते हैं, साथ ही अपने खर्च पर एक नजर डालते हैं और इसी समीक्षा के आधार पर अगले साल के खर्चों को तय करते हैं। इससे हमें अपनी वित्तीय जरूरतों और प्रबंधन को समझने में मदद मिलती है। इसी तरह देश का आगामी बजट पेश किए जाने से पूर्व चालू वित्त वर्ष की आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा की जाती है।



आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व क्या है?


आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व यही है कि यह देश की आर्थिक स्थिति को दिखाता है। आर्थिक सर्वेक्षण पैसे की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे, कृषि और औद्योगिक उत्पादन, रोजगार, कीमतों, निर्यात, आयात, विदेशी मुद्रा भंडार के साथ-साथ अन्य प्रांसगिक आर्तिक कारकों का विश्लेषण करता है।


यह दस्तावेज सरकार का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो अर्थव्यवस्था की प्रमुख चिंताओं पर भी ध्यान केंद्रित करता है। आर्थिक सर्वेक्षण का डाटा और विश्लेषण आमतौर पर केंद्रीय बजट के लिए एक नीतिगत दृष्टिकोण प्रदान करता है।


आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करना अनिवार्य है?


ऐसा जरूरी नहीं है, सरकार इसके लिए किसी तरह से संवैधानिक तौर पर बाध्य नहीं है। यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है कि वह दस्तावेज में सूचीबद्ध सुझावों को चुनना या अस्वीकार करना चाहती है या नहीं। इसके अलावा केंद्र सरकार आर्थिक सर्वेक्षण को प्रस्तुत करने के लिए भी बाध्य नहीं है। इसे इसलिए पेश किया जाता है क्योंकि ये महत्वपूर्ण दस्तावेज है।


कौन तैयार करता है आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट


भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के नेतृत्व वाली समिति यह दस्तावेज तैयार करती है। वर्तमान में कृष्मूर्ति सुब्रमण्यम भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं।


कौन हैं कृष्मूर्ति सुब्रमण्यम


आर्थिक समीक्षा से सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की आर्थिक दृष्टि और इकोनॉमी की जमीनी स्थिति का पता चलता है। ऐसे में देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार को जानना बहुत अहम होता है। मौजूदा वक्त में कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम इस अहम जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। के सुब्रमण्यम को 2018 में सरकार का मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। इस पद पर नियुक्ति से पहले सुब्रमण्यम हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर थे।


सुब्रमण्यम के लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने कोलकाता स्थित आईआईएम से पीजीडीएम किया था। इसके अलावा उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से भी पढ़ाई की है।


टीम स्टेट टुडे


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