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कब तक सुधरेंगे श्रीलंका के बिगड़े हालात, भारत की क्या भूमिका- जानें एक्सपर्ट व्यू


नई दिल्‍ली, 10 मई 2022 : श्रीलंका में जिसतरह की आर्थिकऔर राजनीतिक परिस्थितियांसामने आ रहीहैं वो पड़ोसीदेश होने केनाते भारत केलिए चिंता काविषय है। आर्थिकऔर राजनीतिक बदहालीका शिकार हुएश्रीलंका में सोमवारको प्रदर्शनकारियों नेकई मंत्रियों औरनेताओं के घरोंको आग केहवाले कर दिया।इन प्रदर्शनकारियों परकाबू पाने केमकसद से पुलिसद्वारा की गईकार्रवाई में पांचलोगों की मौतभी हो गई, जिसके बाद राजधानीसमेत कई दूसरेइलाकों में कर्फ्यूलगाना पड़ा है।भारत श्रीलंका कीस्थिति पर नसिर्फ नजर बनाएहुए हुए हैबल्कि उसको आर्थिकऔर मानवीय मददभी कर रहाहै। यहां परकुछ सवाल बेहदखास हैं जोलगातार सामने आ रहेहैं।

कुछ बड़ेसवाल

इनमें पहला सवालहै कि श्रीलंकाकी इस स्थितिका असर परभारत पर क्‍या पड़ेगा।दूसरा सवाल हैकि श्रीलंका क्‍या इसस्थिति से उबरपाएगा, यदि हांतो वो कैसे।तीसरा सवाल हैकि श्रीलंका कोइस मुश्किल दौरसे बाहर निकालनेमें भारत कीक्‍या भूमिकाहो सकती है।आखिरी सवाल हैकि क्‍याश्रीलंका की इसस्थिति का फायदाचीन उठाएगा। इनसभी सवालों केजवाब तलाशे जानेबेहद जरूरी हैं।

भारत कीअहम भूमिका

दक्षिण एशिया कीराजनीति पर नजररखने वाले जवाहरलालनेहरू के प्रोफेसरबीआर दीपक नेइस सभी सवालोंका जवाब देतेहुए कहा हैकि श्रीलंका कीये स्थिति ज्‍यादा समयतक नहीं रहनेवाली है। उनकेमुताबिक श्रीलंका को इसस्थिति से निकालनेमें भारत एकअहम भूमिका निभासकता है। इसकेलिए भारत कोन सिर्फ श्रीलंकाको आर्थिक मददकरनी होगी बल्किनई सरकार कोबनाने में भीअपना योगदान देनाहोगा। बता देंकि श्रीलंका कीमौजूदा सरकार को लेकरकाफी समय सेसड़कों पर विरोधप्रदर्शनों का दौरचल रहा है।प्रदर्शनकारी लगातार राष्‍ट्रपतिसे इस्‍तीफादेने की मांगकर रहे हैं।

चीन कोनापसंद करते हैंलोग

प्रोफेसर दीपक काकहना है किगोटाबाया और राजपक्षेकी चीन सेकरीबी ने देशको बदहाली कीकगार पर पहुंचादिया है। इसकेअलावा उनकी गलतनीतियों की इसमेंसबसे बड़ी भूमिकारही है। हालांकि, प्रोफेसर दीपक येनहीं मानते हैंकि श्रीलंका कीइस स्थिति काफायदा चीन उठानेमें सफल होपाएगा। उनका कहनाहै कि श्रीलंकाके लोग हमेशासे ही भारतसे एक करीबीरिश्‍ता रखतेहैं। मौजूदा समयमें भी उनकीनिगाह भारत परही है। वोकभी नहीं चाहेंगेकि जिस चीनकी वजह सेउनका ये हालहआ है वोचीन दोबारा इसतरफ का रुखकरे। वहीं सरकारभी नहीं चाहेगीकि वो चीनके साथ दोबाराकिसी तरह कामोह दिखाए।

जल्‍दसंभल जाएगा श्रीलंका

प्रोफेसर दीपक केमुताबिक श्रीलंका की इकनामिकग्रोथ कुछ समयपहले तक काफीबेहतर रही है।ऐसे में मौजूदासंकट ज्‍यादासमय तक बनानहीं रह सकेगा।नई सरकार केबनने के बादइस संकट केसमाधान की संभावनाअधिक होगी। नईसरकार के लिएदोबारा अपने पर्यटनको पटरी परलाने की बड़ीचुनौती जरूर सामनेहोगी। बता देंकि पर्यटन श्रीलंकाकी अर्थव्‍यवस्‍था मेंबड़ा योगदान देताहै।

भारत केलिए चीन कीचुनौती

गौरतलब है किश्रीलंका के हंबनटोटापोर्ट को चीनने 99 वर्षों कीलीज पर लियाहुआ है। हालांकिवो यहां परअपना सैन्‍यअड्डा नहीं बनासकता है। वहींदूसरी तरफ सोलोमनद्वीप के साथहुए करार केतहत वहां परवो अपनी सेनाको भेज सकताहै। इसलिए भारतको इससे घबरानेकी जरूरत नहींहै।

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