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यूपी में नाइट कर्फ्यू क्यों नहीं? बढ़ते कोरोना मामलों पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा



योगी सरकार उत्तर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप से चिंतित है। सरकार की तरफ से तमाम गाइडलाइंस भी जारी की जा रही है। जिलों में सख्ती भी शुरु हो गई है। बावजूद इसके कोरोना का संक्रमण थामे नहीं थम रहा है।

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की जनता से अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील करते हुए सरकार के दूसरे कारगर उपाय करने को कहा है।


कोर्ट मे कहा है कि सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के कदम उठाएं हैं, किंतु सरकारी दिशा निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निर्देशों का कड़ाई से पालन कराएं।


कोर्ट ने सरकार से देर शाम समारोहों में भीड़ नियंत्रित करने के साथ ही नाइट कर्फ्यू पर भी विचार करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 45 वर्ष से ऊपर की आयु के बजाए सभी लोगों का उनके घरों पर वैक्सीनशन पर सरकार विचार करे।


इलाहाबाद हाईकोर्ट से का यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने दिया है। अदालत कोरोना संक्रमण मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थई।


अगली सुनवाई आठ अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी। कोर्ट ने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह सौ फीसदी मास्क पहनना अनिवार्य रूप से लागू कराएं। डीजीपी से अपेक्षा की गई है कि वह इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करा कर उसे अमल में लाना सुनिश्चित कराएंगे।


अदालत ने कहा है कि कहीं भी भीड़ इकट्ठा न होने दी जाए और उसे तुरंत तितर-बितर किया जाय। खास तौर पर पंचायत चुनावों के लिए नामांकन व प्रचार में भीड़ न होने दी जाए। प्रचार के समय कोरोना गाइड लाइंस का पालन किया जाए। साथ ही कोर्ट ने घर-घर जाकर टीके लगाने पर विचार करने का निर्देश देते हुए यह भी कहा है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की जांच कराई जाए।


लखनऊ में जिलाधिकारी का आदेश



लखनऊ में जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराने का आदेश दिया है। पुलिस-प्रशासन में एक एक महत्वपूर्ण व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारी बताई गई है। हेल्पलाइन नंबर जारी किए गये हैं। साथ ही एंबुलेस और अस्पतालों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।


टीम स्टेट टुडे


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