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ज्ञानवापी परिसर के भीतर Vyas Ji Ka Tehkhana में 31 साल बाद शुरु हुई पूजा-अर्चना, बम-बम बोल रहा है Kashi




उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर के भीतर व्यासजी तहखाने में पूजा- पाठ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। व्यासजी तहखाने में पूजा शुरू कराने का आदेश जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट से जारी किया गया। इसके बाद देर शाम से प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई। आधी रात के बाद मंदिर का दरवाजा खोला गया। मंदिर को गंगाजल से पवित्र किया गया। इसके बाद वहां पर पूजा- पाठ शुरू कर दिया गया। पूजा को रोकने के लिए मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। लेकिन, कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में मामला जाने के साथ ही व्यासजी तहखाने में पूजा की तस्वीरें सामने आई हैं। पुजारी ने 4 दिसंबर 1993 के करीब 31 साल बाद व्यासजी तहखाने में एक फरवरी की आधी रात के बाद प्रवेश किया। भगवान आदि विश्वेश्वर के विग्रहों की पूजा की। आरती की गई। इसकी तस्वीरों और वीडियो आने के बाद हलचल बढ़ गई है। वहीं, पूजा के दौरान काशी विश्वनाथ परिसर में हर हर महादेव के जयकारे लगते रहे।

 

31 साल बाद भक्तों ने किया विग्रहों का दर्शन


ज्ञानवापी परिसर के व्यासजी तहखाने में पूजा- अर्चना शुरू होने के 31 साज बाद भक्तों ने विग्रहों का दर्शन किया। व्यासजी परिवार की ओर से पूजा- पाठ शुरू किया गया है। तहखाने की स्थिति को देखते हुए वहां पर स्थिति को बेहतर बनाया गया। व्यास परिवार के प्रतिनिधि जितेंद्रनाथ व्यास ने कहा कि हमारा परिवार पीढ़ियों से तहखाने में विराजमान देवी- देवताओं की पूजा- अर्चना करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि भक्तों के नियमित दर्शन के लिए व्यवस्था प्रशासन के स्तर पर की जाएगी। प्रशासनिक आदेश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


कोर्ट के आदेश के आद पूजा शुरू होने से भक्तों में अजब- सा उत्साह दिखा। ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में पूजा शुरू होने के समय आधी रात को दर्जनों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दरबार में मौजूद थे। जैसे ही उन्हें पूजा- पाठ शुरू होने की जानकारी मिली। वहीं, तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद भक्तों ने करीब 31 साल बाद विग्रहों का दर्शन किया।


व्यासजी तहखाने में होगी पांच आरती


हिंदू पक्ष के वकील विष्णुशंकर जैन ने व्यासजी तहखाने में पूजा को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया है कि व्यासजी तहखाने में हर रोज पांच आरती होगी। पहली आरती सुबह 3:30 बजे होगी। दोपहर 12 बजे भोग आरती का समय निर्धारित किया गया है। अपराह्न आरती शाम 4 बजे होगी। वहीं, शायंकाल आरती शाम 7 बजे आयोजित होगी। रात 10:30 बजे शयन आरती का आयोजन होगा। वकील ने बताया कि अब तक दो आरती हो चुकी है। तीसरी आरती शाम 4 बजे होगी।

 

ओवैसी ने बोला हमला


एआईएमएआई प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वाराणसी जिला जज के आदेश पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह आदेश ज्ञानवापी परिसर को कब्जाने की शुरुआत है। उन्होंने आशंका जताई कि ज्ञानवापी में 6 दिसंबर दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज जो कोर्ट ने फैसला लिया है, उससे पूरे मामले को तय कर लिया गया है। यह सरासर गलत फैसला है। जिला जज के फैसले पर ओवैसी ने कहा कि जिला जज ने तो पूरे मामले को डिसाइड कर दिया। यह पूजा का अधिकार अधिनियम 1991 का उल्लंघन है।

  

आवैसी ने कहा कि 30 साल बाद वहां पूजा की इजाजत दिया गया है। इसके लिए 30 दिनों का समय दिया जाना चाहिए था। कोर्ट ने महज 7 दिन का समय दिया। उन्होंने कहा कि बाबरी कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने आस्था के आधार पर फैसला दिया। इसी कारण ये सभी मामले खुल रहे हैं।

 

 

ज्ञानवापी: क्या है व्यासजी का तहखाना और इसके अंदर क्या-क्या मौजूद? जानें 1993 तक यहां कौन करता था पूजा


व्यासजी का तहखाना ज्ञानवापी परिसर में मंदिर भवन के दक्षिण दिशा में स्थित है। सोमनाथ व्यास का परिवार 1993 तक तहखाने में पूजा पाठ करता था। दिसम्बर 1993 के बाद पूजारी व्यासजी को इस प्रांगण के बेरिकेट वाले क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया।


क्या है व्यासजी का तहखाना?


ज्ञानवापी परिसर में मौजूद व्यासजी तहखाना में पूजा की मांग को लेकर वर्षों से अदालती लड़ाई चल रही है। ताजा फैसले में बताया गया कि वादी हिंदू पक्ष ने बताया कि मंदिर भवन के दक्षिण दिशा में स्थित तहखाने में मूर्ति की पूजा होती थी। दिसम्बर 1993 के बाद पुजारी व्यासजी को इस प्रांगण के बेरिकेट वाले क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इस कारण तहखाने में होने वाले राग-भोग आदि संस्कार भी रुक गये। हिंदू पक्ष ने दलील दी कि इस बात के पर्याप्त आधार है कि वंशानुगत आधार पर पुजारी व्यासजी ब्रिटिश शासन काल में भी वहां कब्जे में थे।

 

व्यासजी ने दिसम्बर 1993 तक वहां भवन में पूजा अर्चना की है। बाद में तहखाने का दरवाजा हटा दिया गया। हिन्दू धर्म की पूजा से सम्बन्धित सामग्री बहुत सी प्राचीन मूर्तियां और धार्मिक महत्व की अन्य सामग्री उस तहखाने में मौजूद हैं। हिंदू पक्ष ने कहा कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने बगैर किसी विधिक अधिकार के तहखाने के भीतर पूजा दिसम्बर 1993 से रोक दी।


हिंदू पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि वह रिसीवर को नियुक्त करे जो तहखाने में पूजारी द्वारा पूजा किया जाना नियंत्रित करे और उसका प्रबंध करे। न्यायालय में 17 जनवरी 2024 को पारित एक आदेश में रिसीवर की नियुक्ति तो कर दी लेकिन तहखाने में पूजा-अर्चना के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया। हिंदू पक्ष ने अपनी दलील में कहा था कि तहखाने में मौजूद मूर्तियों की पूजा नियमित रूप से की जानी आवश्यक है।


अभी क्या फैसला आया है?


31 जनवरी 2024 को जिला जज की कोर्ट ने अपने एक आदेश में व्यासजी के तहखाने में पूजा की अनुमति दे दी। ज्ञानवापी स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा किए संबंधी आवेदन पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में दोनों पक्ष की तरफ से मंगलवार को बहस पूरी कर ली गई थी। अदालत ने इस प्रकरण में बुधवार को अपना आदेश सुनाया। तहखाने में पूजा करने की अनुमति मिल गई है। हिंदू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी कहते ने कहा व्यासजी के तहखाने में पूजा करने का अधिकार दिया गया है और कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर आदेश का अनुपालन करने का आदेश जिला अधिकारी को दिया है।

 

अब आगे क्या?


वादी अधिवक्ताओं ने कहा है कि व्यासजी के तहखाने को डीएम की सुपुर्दगी में दिया गया है। अधिवक्ताओं के अनुरोध पर कोर्ट ने नंदी के सामने की बैरिकेडिंग को खोलने की अनुमति दी है। ऐसे में अब तहखाने में 1993 के पहले के जैसे पूजा के लिए अदालत के आदेश से आने- जाने दिया जाएगा।



 


ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में 30 साल पहले इस वजह से बंद हुई थी पूजा, अब फिर मिली अनुमति


ज्ञानवापी परिसर के व्यासजी के तहखाने में पूजा करने का अधिकार कोर्ट की तरफ से दिया गया है। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर आदेश का अनुपालन करने का आदेश जिला अधिकारी को दिया है।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत हुई है। 30 साल बाद अदालत ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी है। व्यासजी का तहखाना वर्ष 1993 से बंद था।

 

इस वजह से बंद हुआ था व्यासजी का तहखाना


ज्ञानवापी स्थित नंदी के मुख के सामने दक्षिणी दीवार के पास मौजूद तहखाने में वर्ष 1551 से व्यास पीठ स्थापित रहा। इसी व्यास पीठ से मां शृंगार गौरी की पूजा, भोग, आरती की जाती रही। वर्ष 1993 में राज्य सरकार व जिला प्रशासन के मौखिक आदेश के जरिये पूजा-पाठ और परंपराओं को बंद करा दिया था। ज्ञानवापी परिसर के चारों ओर लोहे की बैरिकेडिंग भी करा दी गई थी। दिसंबर 1993 में ही तत्कालीन जिलाधिकारी ने व्यास पीठ के तत्कालीन पुजारी पंडित सोमनाथ व्यास के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए पूजा-पाठ पर रोक लगा दी। तहखाने में भी ताला लगा दिया था।


वर्ष 1996 में दायर आदिविश्वेश्वर बनाम राज्य सरकार के वाद में नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में तहखाने के एक ताले की दो चाबी का जिक्र किया था। तत्कालीन जिलाधिकारी के ताला खोलने से मना करने के बाद व्यास पीठ के पंडित सोमनाथ व्यास ने एक चाबी से ताला खोला था। इसके बादज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वे के दौरान नंदी जी के सामने स्थित इस तहखाने का दरवाजा खुला था।



 

ज्ञानवापी केस: औरंगजेब के मंदिर तोड़ने से लेकर व्यास तहखाने में 30 साल बाद पूजा की इजाजत तक, जानें पूरी कहानी


जिस ज्ञानवापी परिसर का ये मुद्दा है, उसी में मुस्लिम पक्ष की मस्जिद भी है। मस्जिद के ठीक बगल में काशी विश्वनाथ मंदिर है। दावा है कि इस मस्जिद को औरंगजेब ने एक मंदिर तोड़कर बनवाया था। ऐसे में आइए हम आपको शुरू से लेकर अब तक की इस विवाद की पूरी कहानी बताते हैं...


ज्ञानवापी मामले में जिला अदालत ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी है। व्यासजी का तहखाना वर्ष 1993 से बंद था।


उधर बीते बुधवार को ही जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्ववेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी में मंदिर का स्ट्रक्चर मिला है।


पहले विवाद जान लीजिए


ज्ञानवापी विवाद को लेकर हिन्दू पक्ष का दावा है कि इसके नीचे 100 फीट ऊंचा आदि विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करीब 2050 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन औरंगजेब ने साल 1664 में मंदिर को तुड़वा दिया। दावे में कहा गया है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर उसकी भूमि पर किया गया है जो कि अब ज्ञानवापी मस्जिद के रूप में जाना जाता है।

 

याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर यह पता लगाया जाए कि जमीन के अंदर का भाग मंदिर का अवशेष है या नहीं। साथ ही विवादित ढांचे का फर्श तोड़कर ये भी पता लगाया जाए कि 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ भी वहां मौजूद हैं या नहीं। मस्जिद की दीवारों की भी जांच कर पता लगाया जाए कि ये मंदिर की हैं या नहीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों से ही ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण हुआ था। इन्हीं दावों पर पर अदालत ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) से सर्वे करवाया था। बीते बुधवार को एएसआई की यह सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई।


इस विवाद को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?


काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी केस में 1991 में वाराणसी कोर्ट में पहला मुकदमा दाखिल हुआ था। याचिका में ज्ञानवापी परिसर में पूजा की अनुमति मांगी गई। प्राचीन मूर्ति स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की ओर से सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय बतौर वादी इसमें शामिल हैं।


मुकदमा दाखिल होने के कुछ महीने बाद सितंबर 1991 में केंद्र सरकार ने पूजा स्थल कानून बना दिया। ये कानून कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।


अयोध्या का मामला उस वक्त कोर्ट में था इसलिए उसे इस कानून से अलग रखा गया था। लेकिन ज्ञानवापी मामले में इसी कानून का हवाला देकर मस्जिद कमेटी ने याचिका को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 1993 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगाकर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था।

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि किसी भी मामले में स्टे ऑर्डर की वैधता केवल छह महीने के लिए ही होगी। उसके बाद ऑर्डर प्रभावी नहीं रहेगा।


इसी आदेश के बाद 2019 में वाराणसी कोर्ट में फिर से इस मामले में सुनवाई शुरू हुई। 2021 में वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दे दी।

आदेश में एक कमीशन नियुक्त किया गया और इस कमीशन को 6 और 7 मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए। 10 मई तक अदालत ने इसे लेकर पूरी जानकारी मांगी थी।

छह मई को पहले दिन का ही सर्वे हो पाया था, लेकिन सात मई को मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मामला कोर्ट पहुंचा।


12 मई को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कमिश्नर को बदलने की मांग खारिज कर दी और 17 मई तक सर्वे का काम पूरा करवाकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जहां, ताले लगे हैं, वहां ताला तुड़वा दीजिए। अगर कोई बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करता है तो उसपर कानूनी कार्रवाई करिए, लेकिन सर्वे का काम हर हालत में पूरा होना चाहिए।


14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर रोक लगाने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने से इनकार करते हुए कहा था कि हम बिना कागजात देखे आदेश जारी नहीं कर सकते हैं। अब मामले में 17 मई को सुनवाई होगी।

14 मई से ही ज्ञानवापी के सर्वे का काम दोबारा शुरू हुआ। सभी बंद कमरों से लेकर कुएं तक की जांच हुई। इस पूरे प्रक्रिया की वीडियो और फोटोग्राफी भी हुई।


16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि कुएं से बाबा मिल गए हैं। इसके अलावा हिंदू स्थल होने के कई साक्ष्य मिले। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि सर्वे के दौरान कुछ नहीं मिला। हिंदू पक्ष ने इसके वैज्ञानिक सर्वे की मांग की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया।


21 जुलाई 2023 को जिला अदालत ने हिंदू पक्ष की मांग को मंजूरी देते हुए ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दे दिया।


24 जनवरी 2024 को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया। जिला जज ने वादी पक्ष को सर्वें रिपोर्ट दिए जाने का आदेश दिया।


25 जनवरी 2024 को रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी में मंदिर का स्ट्रक्चर मिला है। इस पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताई।


31 जनवरी 2024 को वाराणसी जिला अदालत ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी।

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