google.com, pub-3470501544538190, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page

गर्मी के प्रकोप से बढ़ा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, लोहिया के न्यूरोलाजी में 15 मरीज भर्ती


लखनऊ, 21 मई 2023 : पिछले कुछ दिनों से सूबे में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। ऐसे मौसम में कई स्वास्थ्य समस्याएं लोगों के सामने आती हैं। इससे बच्चों से लेकर बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी की वजह से डिहाइड्रेशन, पेट दर्द, उल्टी, बुखार और डायरिया तो सामान्य बीमारी है। लेकिन, इन दिनों बड़ी संख्या में मिर्गी, दिमागी दौरे, अस्थिरता और ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं। लोहिया संस्थान की न्यूरोलाजी विभाग में पिछले एक सप्ताह में 15 ब्रेन स्ट्रोक के मरीज भर्ती हुए हैं।

तेज गर्मी और लू से बढ़ा खतरा

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के न्यूरोलाजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर अब्दुल कवि का कहना है कि लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों तेज गर्म हवाओं ने तापमान बढ़ा दिया है। इस वजह से ओपीडी में रोजाना 10-15 ब्रेन और हीट स्ट्रोक के मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि, इनमें आधे को ही भर्ती होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि यूं गर्मी के मौसम में ये कोई नई बात नहीं है। गर्मी का प्रकोप चाहे जितना हो कोई घर के अंदर कैद नहीं हो सकता। लोग नियमित दफ्तर या काम के लिए घर से बाहर जरूर निकलते हैं। लेकिन, ऐसे मौसम में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। क्योंकि लापरवाही जानलेवा हो सकती है।

मरीज के लिए साढ़े चार घंटे अहम

डा. अब्दुल कवि के मुताबिक, ब्रेन स्ट्रोक दिमाग को रक्त की आपूर्ति करने वाली नसों के फटने या फिर थक्का जमने की वजह से होता है। इसमें लक्षणों की पहचान करने के साथ तत्काल इलाज की जरूरत होती है। देरी होने पर मरीज की जान भी जा सकती है। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति को स्ट्रोक तब होता है, जब रक्त की आपूर्ति कम या बाधित होने के कारण दिमाग के सेल्स मरने लगते हैं। उन्होंने कहा, गर्मी का प्रकोप बढ़ते ही शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगता है। इसकी चपेट में ज्यादातर ऐसे लोग आते हैं, जो लंबे समय तक तेज धूप और बढ़े हुए तापमान के सीधे संपर्क में रहते हैं।

डा. अब्दुल कवि कहते हैं कि अगर ब्रेन स्ट्रोक के मरीज को साढ़े चार घंटे के भीतर ऐसे अस्पताल ले जाया जाए जहां न्यूरो के विशेषज्ञ हों तो बचने की उम्मीद अधिक होती है। मरीज के अस्पताल पहुंचने और सीटी स्कैन में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि होने पर वैक्सीन से रक्त नलिकाओं में जमे खून के थक्कों को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके बाद 24 घंटे तक रोगी को गंभीर स्थिति से बचाने के लिए ऐसे अस्पताल में भर्ती कराएं जहां मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक की सुविधा हो। इसमें मस्तिष्क में तार डालकर ब्लाकेज को हटाया दिया जाता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज-कमजोरी या सुन्न होना-अचानक आंखों से धुंधला दिखना-अचानक बेहोश होना-तेज सिर दर्द-शरीर संतुलन में दिक्कत-हाथ-पैर में कंपन।

इन बातों का रखें ध्यान-बीपी और न्यूरो के मरीज नियमित दवा लें-हल्के रंग और हल्के वजन वाले कपड़े पहनें।-धूप के सीधे संपर्क में आने से बचें। बाहर जाते समय छाता लेकर या टोपी पहनकर जाएं।-खूब सारा पानी और जूस जैसे नारियल पानी, नींबू पानी पीएं।-सिगरेट, शराब, साफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक का सेवन करने से बचें। -सड़क पर बिक रहे बेल, गन्ने और फलों का जूस पीने से बचें।-धनिया, पुदीना, ककड़ी, खीरा, तरोई और लौकी का अधिक सेवन करें-टमाटर, लहसुन, बेल का मुरब्बा, खरबूजा व तरबूजा फायदेमंद है-हींग, अजवाइन, सौंफ का प्रयोग गर्मी में काफी फायदेमंद है -सुबह नियमित टहलें

1 view0 comments

Comments


bottom of page