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UP में कानून-व्यवस्था को और बेहतर करने में खर्च होंगे 37165.99 करोड़


लखनऊ, 23 फरवरी 2023 : कानून-व्यवस्था के मोर्च पर चौबीस घंटे डटे रहने वाले पुलिस अधिकारी व कर्मी पूरे मनोयोग से अपने ड्यूटी पर मुस्तैद रहें, इसके लिए सरकार ने उनके आराम की भी चिंता की है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हो रही यूपी पुलिस की सेहत पर भी सरकार का फोकस है। लंबी ड्यूटी के बाद पुलिसकर्मी वापस लौटें तो सुविधाजनक बैरक में आराम कर सकें, इसके लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में पुलिस विभाग को 2250 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। इनसे पुलिस के आवासीय व अनावासीय भवनों का निर्माण होगा। पुलिस विभाग का कुल बजट 37165.99 करोड़ रुपये है।

आवासीय सुविधाओं के लिए खर्च किए जाएंगे एक हजार करोड़ रुपये

पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की आवासीय सुविधाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा पुलिस कमिश्नरेट के कार्यालयों व अनावसीय भवनों के निर्माण के लिए 850 रुपये व शहरों में पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को बेहतर आवासीय सुविधा प्रदान करने के लिए 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

लखनऊ समेत सात महानगरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है, जहां अब तक किराये के भवनों में चल रहे पुलिस कार्यालयों के स्थान पर पुलिस विभाग के अपने भवनों का निर्माण तेजी से कराया जा सकेगा। प्रदेश में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) को भी और मजबूत बनाया जा रहा है। सरकार ने एसडीआरएफ को नये वाहन उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रबंध भी किया है। प्रदेश में बीते साढ़े पांच वर्षो में यूपी पुलिस में विभिन्न पदों पर 1.60 लाख से अधिक भर्ती की गई है। प्रदेश में पहली बार तीन महिला पीएसी बटालियन स्थापित की जा रही है

वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ पुलिस लाइन का निरीक्षण करने के उपरांत पुलिसकर्मियों की आवासीय सुविधाओं को बेहतर बनाने का निर्देश दिया था। इस कड़ी में सरकार ने पुलिस विभाग के आवासीय अनावासीय भवनों के लिए निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में दिए गए 708.62 करोड़ रुपये के बजट को लगभग चार गुणा बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2021-22 में 2968.74 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। वहीं पिछले बजट वर्ष 2022-23 में 2047.26 करोड़ रुपये प्रदान किए गए थे।

पुलिस आधुनिकीकरण के साथ-साथ सरकार ने पुलिस की आवासीय सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इस वर्ष भी पुलिस भवनों के निर्माण के लिए बड़े बजट की व्यवस्था की है। पिछले वित्तीय वर्ष में 1582 करोड़ रुपये की लागत से पुलिस भवनों के 437 कार्य पूर्ण कराये गए हैं। जबकि 250 से अधिक निर्माण कार्य अभी पूरे कराए जाने हैं। वर्तमान बजट में मिली राशि से इन कार्यों को जल्द पूर्ण कराया जा सकेगा। प्रदेश में पहली बार तीन महिला पीएसी बटालियन स्थापित की जा रही हैं। वर्तमान बजट में इनके कार्यों को जल्द पूरा कराए जाने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

प्रदेश में संगीन घटनाओं में आई कमी

संगीन घटनाओं में हुई कमी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 में आए निवेश प्रस्तावों के पीछे प्रदेश की बदली कानून-व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यूपी पुलिस को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस कराने के लिए लगातार कदम उठाते रहे हैं। बजट भाषण में प्रदेश की बदली कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई और वर्ष 2016 की तुलना में वर्तमान में संगीन अपराधों में आई कमी का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया गया। वर्ष 2022 में वर्ष 2016 की तुलना में डकैती में 80.31 प्रतिशत, लूट में 61.51 प्रतिशत, हत्या में 32.45 प्रतिशत, बलवा में 51.65 प्रतिशत, गृहभेदन में 5.59 प्रतिशत, चोरी में 17.22 प्रतिशत व फिरौती के लिए अपहरण में 43.18 प्रतिशत की कमी का दावा किया गया।

महिलाओं विरुद्ध अपराध का भी पारा गिरा महिलाओं के विरुद्ध घटित अपराधों में दहेज मृत्यु में 15.81 प्रतिशत, दुष्कर्म में 21.75 प्रतिशत व अपहरण में 9.17 प्रतिशत की कमी का दावा किया गया। वहीं प्रदेश में एण्टी भू-माफिया पोर्टल पर अवैध कब्जे से संबंधित 3,41,236 शिकायतें आईं, जिनमें 3,39,552 का निस्तारण कराया गया। अभियान के अन्तर्गत 70 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अतिक्रमण से अवमुक्त कराया गया है। 23,920 राजस्व वाद, 923 सिविल वाद व 4504 एफआइआर दर्ज कराई गईं।

847 भू-माफिया चिन्हित, वर्तमान में 196 भू-माफिया जेल में।

हर परिक्षेत्र में साइबर क्राइम पुलिस थाना की स्थापना की गई।

प्रदेश के सभी 1531थानों में साइबर हेल्प डेस्क की स्थापना की गई।

परिक्षेत्रीय मुख्यालयों पर बेसिक साइबर फारेंसिक लैब बनीं।

पुलिस मुख्यालय पर एडवांस्ड डिजिटल साइबर फारेंसिक लैब स्थापित।

बलिदानियों के आश्रितों को 17.96 करोड़ रुपये प्रदान किए गए।

पुलिस वाहनों के लिए भी खोला पिटारा

पुलिस विभाग को नए वाहन उपलब्ध कराने के लिए लगभग 71 करोड़ा रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से एसटीएफ के वाहनों के लिए 1.53 करोड़ रुपये, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए वाहनों की खरीद के लिए 25 करोड़ रुपये, जिलों में सीओ सर्किल स्तर के वाहनों की खरीद के लिए 10 करोड़ रुपये, पीएसी के वाहनों के लिए 15 करोड़ रुपये, अभिसूचना विभाग के वाहनों के लिए पांच करोड़ रुपये व एटीएस के स्पाट के वाहनों के लिए दो करोड़ रुपये का खर्च प्रस्तावित है। यूपी फारेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट में उपकरणों के लिए पांच करोड़ व एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के लिए 9.88 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

पुलिस के बजट में साढ़े चार हजार करोड़ का उछाल

पुलिस विभाग के सुदृढ़ीकरण व आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने बजट को भी हर बढ़ाया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में गृह विभाग का बजट 16115.18 करोड़ रुपये था। वर्तमान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में गृह विभाग के बजट को बढ़ाकर 30203.92 करोड़ रुपये किया था। इसका नतीजा रहा कि पुलिस विभाग को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किए जाने के साथ ही नई बैरकों, थानों, पुलिस लाइन व अन्य भवनों के निर्माण कराए जा सके। वित्तीय वर्ष 2022-23 में गृह विभाग के लिए 32665.43 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 37165.99 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है,जो पिछले बजट से 4500 करोड़ रुपये अधिक है।

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