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9 साल से 'छुट्टी' की राह देख रहे यूपी के पुलिसकर्मी, 2013 में बनी थी सप्‍ताहिक अवकाश की योजना


लखनऊ, 14 अप्रैल 2022 : कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, उन्हें आराम नहीं। मानसिक तनाव और छुट्टी नहीं मिल पाने की कसक पुलिसकर्मियों में अक्सर देखने को मिलती है। अवकाश नहीं मिलने पर कई पुलिसकर्मी इस्तीफा देने की पेशकश भी कर चुके हैं। इन सबके बावजूद जून 2013 में पुलिसकर्मियों के लिए शुरू की गई साप्ताहिक अवकाश योजना लखनऊ में नौ साल से छुट्टी पर है। भदोही पुलिस ने नौ दिन की ड्यूटी के बाद एक दिन की छुट्टी देने की व्यवस्था लागू की है। इससे अन्य जिलों के पुलिसकर्मियों में भी उम्मीद की किरण जगी है।

शोध के साथ हुई थी शुरूआत : एक जून 2013 को तत्कालीन डीआइजी लखनऊ नवनीत सिकेरा ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोमतीनगर थाने के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देकर इस पहल की शुरूआत की। इसे अमली जामा पहनाने के लिए शोध तक किए गए। इसका नतीजा भी सफल और सकारात्मक रहा। छुट्टी लेने वाले पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाता था।

जांच में पुलिसकर्मियों का ब्लड प्रेशर व एक्टिव मशीन से उनकी नींद, थकान एवं तनाव के बारे में जानकारी ली जाती थी। शोध में अवकाश देने की योजना सार्थक साबित हुई थी और पुलिसकर्मी भी मानसिक व शारीरिक तौर पर स्वस्थ पाए गए थे। यही नहीं छुट्टी हासिल करने वाले पुलिसकर्मियों ने प्रतिक्रिया में इस पहल को लाभकारी बताया था। हालांकि विभाग के जिम्मेदार इस पहल को स्थाई तौर पर लागू नहीं करा सके।

अन्य कर्मचारियों की अपेक्षा छुट्टियां भी कम : पुलिसकर्मियों को अन्य सरकारी कर्मचारियों की अपेक्षा वर्ष में महज 60 छुट्टियां ही दी जाती हैं। इनमें 30 सीएल और 30 इएल शामिल हैं। पुलिसकर्मियों को इन छुट्टियों के लिए भी माथापच्ची करनी पड़ती है। खास बात ये है कि त्योहार व अन्य सार्वजनिक अवकाश पर पुलिसकर्मियों की छुट्टी निरस्त कर दी जाती है।

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