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अखिलेश यादव की गणित से वो हुआ जो आजादी के बाद से अब तक यूपी की राजनीति में परवान नहीं चढ़ पाया !



उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में जो सियासी समीकरण अंबेडकरनगर में बना है उसकी काट फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आती।


समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार उत्तर प्रदेश के हर जिले में अलग रणनीति के साथ अपना कुनबा बढ़ाते जा रहे हैं।


इसी क्रम में बीएसपी के दो कद्दावर नेता लालजी वर्मा और रामअचल राजभर समाजवादी हो गए। अब तक अंबेडकरवादी रहे लालजी और रामअचल राजभर ने लोहिया के शिष्यों से हाथ मिला लिया। आजादी के बाद एक समय ऐसा आया था जब अंबेडकर और लोहिया दोनों ने मिलकर दलित और पिछड़ों को साथ लेकर भारतीय राजनीति को नई दिशा देने का प्रयास करने का तय किया था लेकिन मंशा पूरी होती इससे पहले ही लोहिया दुनिया को अलविदा कह गए।



90 के दशक में अयोध्या में ढांचा गिरने के बाद रामलहर पर सवार बीजेपी को मुलायम और कांशीराम के साथ ने सत्ता में आने से रोक दिया था। लेकिन ना तो उस समय का वो गठबंधन परवान चढ़ पाया और ना ही 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश और मायावती का गठबंधन वोट ट्रांसफर करा पाया।


अब 2022 के विधानसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प यह है कि बीएसपी को इलाकाई ताकत देते रहे नेता सीधे समाजवादी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में जो जातीय समीकरण अबतक पार्टियों के लिए सपना था उसे साध कर अखिलेश अपनी सियासी राह को आसान कर रहे हैं।



अंबेडकरनगर की जनादेश रैली में अखिलेश यादव सत्ताधारी पार्टी बीजेपी पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अच्छे दिन लाने का वादा कर गरीबों से वोट लिया और सत्ता में आते ही सरकारी संपत्तियां उद्योगपतियों को बेच दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के रहते प्रदेश का विकास संभव नहीं है। आने वाले विधानसभा चुनाव में सपा की सरकार बननी तय है।


अखिलेश यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर तथा डॉ. राममनोहर लोहिया के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रैली में आने वालों का धन्यवाद। लोगों में उत्साह साफ दिख रहा है। यह जनसैलाब इतिहास लिखेगा। जनादेश रैली में अखिलेश यादव ने राम अचल राजभर व लालजी वर्मा का स्वागत किया।


अखिलेश ने अपनी रैली में किसानों की समस्या, मंहगाई की मार, तीन राज्यों में भाजपा की हार, डीजल व पेट्रोल के दाम, डायल 100, लैपटॉप, टैबलेट, एम्बुलेंस, स्वास्थ्य जैसे कई मुद्दे उठाकर बीजेपी की योगी सरकार को जमकर निशाने पर लिया।


अखिलेश यादव ने इस दौरान नोटबंदी की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि याद कीजिए नोटबंदी हुई थी और भाजपा ने कहा था कि भष्टाचार खत्म हो जाएगा, कालाधन आएगा। आप लोग बताओ कितने साल हो गए नोटबंदी को। क्या भष्टाचार खत्म हो गया। विदेश से कितना कालाधन विदेश से वापस आया है। उन्होंने कहा कि 2022 में अच्छी सरकार चुनो, जिससे कि आपको बेहतर मुख्यमंत्री भी मिले।


समाजवादी पार्टी में शामिल हुए लालजी वर्मा ने कहा कि अम्बेडकरनगर के आसपास के जिलों में भारतीय जनता पार्टी का खेल खेल खत्म हो गया है। भाजपा के लोग हमें जाति-धर्म में बांट रहे हैं। इनके प्रयास सफल नहीं होंगे।

अम्बेडकरनगर के पांच विधानसभा क्षेत्र में से दो सीट भाजपा तथा दो सीट बसपा के पास हैं। इनमें से एक पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। बसपा से निष्कासित लालजी वर्मा कटहरी तथा रामअचल राजभर अकबरपुर से विधायक हैं। भाजपा की संजू देवी टांडा तथा अनीता आलापुर से विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के सुभाष राय जलालपुर से विधायक हैं। अम्बेडकरनगर से सांसद भी बसपा के रितेश कुमार पाण्डेय हैं।


जाहिर है चुनाव से पहले जातीय तानेबाने और खुद को राजनीति में जिंदा रखने के लिए दल बदलना नेताओं का पुराना शगल रहा है लेकिन जब इसमें जातीय तड़का लगता है और दो विभिन्न विचारधाराओं का समागम होता है तो कई बार नतीजे चौंका देते हैं। इस बार चौंकाने का ये काम करने का बीड़ा अखिलेश यादव, राम अचल राजभर, कमलकांत राजभर और ओमप्रकाश राजभर की चौकड़ी करने जा रही है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि दशकों से राजभर समाज और यादव समाज एक दूसरे की मुखालफत करता ही आया है।


अंबेडकर नगर की जिस धरती पर ये मंच सजाया गया वो डाक्टर राममनोहर लोहिया कि जन्मभूमि-कर्मभूमि है।


टीम स्टेट टुडे


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