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*स्वतन्त्रता-संघर्ष की थाती बचाएं ! योगीजी से बुद्धिकर्मियों की अपील !!*

Updated: Nov 23



के. विक्रमराव (वरिष्ठ पत्रकार) : आजादी के अमृतमहोत्सव के दौरमें पश्चिमी लखनऊकी डेढ़ सदीपुरानी इमारत रिफा-ए-आम काअधिग्रहण तथा जीर्णोध्दारसंभव था। शासनउदासीन रहा। अनमनाभी। नतीजन यहऐतिहासिक भवन उपेक्षितरही। ढहती रही।भू माफियाओं कीदृष्टि भी पैनीहोती गयी। एकमाफिया ने तो 1857 वाले बेलीगारद के अंदरही बहुमंजिला ढांचाखड़ा कर दियाथा। योगी सरकारके बुल्डोजर नेउसे गिरा दिया।रिफा-ए-आमतो साक्षी रहागांधी-तिलक-जिन्ना-नेहरू-पटेल कीसभाओं का। श्रोताभी था उनकेअंग्रेज-विरोधी भाषणों का।यह लखनऊ सिटीस्टेशन से लगाहुआ है। राजभवनसे 5 किलोमीटर दूर।इस बौद्धिक केंद्रपर दैनिक "नवभारतटाइम" में आज (5 नवंबर 2022) द्रवित कर देनेवाली रपट छपीहै। पृष्ट 5 परतीन कालम की।



यहअखबारी रपट कहतीहै: "रिफा-ए-आम" क्लब ग्राउंडको अवैध बससंचालन का अड्डाबना रखा गयाथा। डग्गामार बसोंके संचालन कीसूचना पर जेसीपीएलओ ने शुक्रवारको छापा मारा।मौके पर मिली 11 डग्गामार बसों कोसीज करने केसाथ ही आठचालकों को दबोचागया। इसके साथही संचालकों केखिलाफ केस दर्जकरवाया गया है।"

इसकेपूर्व (2 अप्रैल 2022) के एकअन्य समाचार केअनुसार :" अवैध रूपसे कब्जाए जमीनपर शादी समारोहके आयोजन केसाथ ही वहाँबाजार भी लगाएजा रहे हैं।किराए पर दुकानेंभी उठाई गई।लंबे समय सेदाऊद इब्राहिम केगुर्गे यहाँ अवैधकब्जा जमाये हुएथे। बाकायदा सुनियोजिततरीके से कब्जाएजमीन पर करोड़ोंरुपए का कारोबारकिया जा रहाहै। एलडीए कीओर से वजीरगंजथाने में दर्जएफआईआर के मुताबिकरिवर बैंक कॉलोनी-स्थित खसरानंबर 147 नजूल कीजमीन है। इसेरिफा-ए-आमक्लब योजना केलिए आरक्षित कियागया था।

गारा, गुम्मा, चारा, चूरा, आलन सेबना यह संघर्षका प्रतीक तोहै, पर यहप्रत्यक्षदर्शी भी रहाफिरंगियों के खिलाफभारत की एकमुहिम का। मोहम्मदअली जिन्ना तबतक हिंदुस्तानी थे, विभाजन के समर्थकनहीं थे। इसीक्लब के प्रांगणमे हिन्दू-मुस्लिमएकता पर भारतीयराष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिमलीग की एकसंयुक्त बैठक हुईथी जिसके कारण 1916 का लखनऊ समझौताहुआ। इसी परिसरमें हस्ताक्षर किएगए थे। महात्मागांधी ने 15 अक्तूबर 1920 को हिंदू-मुस्लिम एकतापर उद्बोधन केलिए इस भवनका दौरा किया।अप्रैल 26, 1922 को जवाहरलालनेहरू और वल्लभभाईपटेल ने स्थानीयलोगों को प्रोत्साहितकरने के लिएभाषण दिए। स्वदेशीआंदोलन को तेजकरने के लिएप्रगतिशील लेखक आंदोलन 10 अप्रैल 1936 में यहीप्रारम्भ किया गयाथा। इसे मुंशीप्रेमचंद ने संबोधितकिया था।

इसी रिफा-ए-आमका आगेदेखू रूपही था चारबागरेलवे स्टेशन परहुई एक घटना।इसी प्लाटेफार्म परबापू से जवाहरलालनेहरू पहली बारमिले थे। तबदो खोंचेवाले चायबेच रहे थे।उनकी पुकार थी: "हिन्दू चाय" और "मुस्लिमचाय।" बापू नेदोनों को बुलाया।तीसरा कुल्हड़ लिया।दोनों से आधी-आधी चायली और तीसरेकुल्लड़ मे डाली।फिर कहा यहहिंदुस्तानी चाय है।इसे बेंचे।" यहींसे विदेशी साम्राज्यकी नींव कमजोरहोनी चालू होगई थी।

इस क्लबके मूल मेंएक जनवादी मकसदभी था। तबमोहम्मदबाग क्लब औरयूनाइटेड सर्विसेज क्लब कोलाट साहब नेनिर्मित किया था।वहां कुत्तों औरहिंदुस्तानियों का प्रवेशवर्जित था। प्रतिरोधमें अवध केनवाबी खानदान नेरिफा-ए-आमक्लब की स्थापनाकी थी। क्लबआज जर्जर हालतमें है। एकसमय मे यहभारत में राष्ट्रीयआंदोलनों का केंद्रहुआ करता था।

फ़ारसीशब्द "रिफ़ा" का मतलबहोता है ख़ुशीऔर "आम" का मतलबहै सामान्य। येक्लब सामान्य लोगोंको ख़ुशियां देताथा। इसका मकसदरहा था किसाधारण लखनवी और अन्यआगन्तुको के वास्तेमिलने की जगहहो। स्वाधीनता केशुरुआती पाँच छःदशकों से अंग्रेजोंके दौर तकआम हिंदुस्तानियों केलिए खुला, यहलखनऊ का पहलाक्लब था। इसीलिएइसका नाम रिफा-ए-आम (जनहित) क्लब रखागया था। इसीजगह प्रथम विश्वयुद्धके समय होमरूललीग के जलसेआयोजित होते थे।इससे अवध केशिया नवाबों नेमजहबी समंजस्य कायमकिया था। यहींपर पहले विश्वयुद्धके जमाने मेंहोमरूल लीग कावह जलसा होनातय हुआ थाजहां एनी बेसेंटकी गिरफ्तारी परप्रतिरोध जताने के लिएशहर के राष्ट्रभक्तजमा हुये थे।लेकिन अंग्रेज सरकारने इसे गैरकानूनीकरार दिया था।ये लखनऊ मेंअपने किस्म कीपहली घटना थी।तब हथियारबंद पुलिससे रिफा-ए-आम मेभर गई थी।सारे शहर मेंजबरदस्त सनसनी फैल गईथी। यहीं परमहात्मा गांधी ने लखनऊवालोंसे असहयोग आंदोलनसे जुड़ने कीअपील की थी।इस खूबसूरत इमारतको अब लोगोंने इस कदरनुकसान पहुंचाया है किये नीचे सेएकदम कमजोर होचुकी है। इसपर अधिकार केलिए कई पक्षोंमें जंग छिड़ीहुई है। बिल्डरोंऔर भू-माफियाकी बुरी नजरभी इस परहै। इसका ऐतिहासिकमैदान कूड़ा डालनेके लिए इस्तेमालहो रहा हैजिस कारण यहांगंदगी का अंबारहै। ये नशेड़ियोंका भी अड्डाहै। इस परगैरकानूनी ढंग सेडग्गामार बसें खड़ीकी जा रहीहैं।

रिफा-ए-आम कीबदहाली पर अवधीसंस्कृति के जानकार स्व. योगेशप्रवीन ने कहाथा: "इस जगहकी हालत राष्ट्रवादऔर सांस्कृतिक गौरवको लेकर हमारीशोशेबाजी की पोलखोलती है। पताचलता है किइतिहास को लेकरहम असल मेंकितने संजीदा औरसंवेदनशील हैं। येइस इमारत कीबदकिस्मती है किये लखनऊ मेंहै, जहां राष्ट्रीयइतिहास को कूड़ेकी वस्तु समझाजाता है। यहीअगर किसी सहीजगह होती तोदेशप्रेमियों का तीर्थकहलाती।"



के. विक्रम राव (वरिष्ठ पत्रकार)

अवध केकुछ इस्लामी शासकोंजिनकी राजधानी लखनऊथी, ने विदेशीआक्रमणकारियों को हरायाथा। लोदी बादशाहोंकी मदद करअवध के नवाबोंने बाबर काभी विरोध कियाथा। तभी सआदतअली खान नेस्वतंत्र नवाब वंशकी स्थापना कीथी। अवध केनवाब शुजाउछौला बक्सर (1764) के युद्ध मे ब्रिटिशजनरल हेक्टर मुनरोसे लड़े थे।यही की बेगमहजरत महल नेतो 1857 में फिरंगियोंको कड़ी टक्करदी थी।


स्वाधीनतासंघर्ष के केन्द्रोतथा प्रतीकों कोसवारने हेतु नरेंद्रदामोदरदास मोदी नेबीड़ा उठाया है।रिफा-ए-आमक्लब आजादी कीथाती है। अतःइसे सँवारने हेतुप्रधानमंत्री से गुहारहै। खासकर उनकेसहयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी से।


@Kvikramrao

श्री के. विक्रम राव जी वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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