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यूपी में बीजेपी करने जा रही है अश्वमेघ यज्ञ – चार योद्धाओं को सौंपी गईं चार दिशाएं



2014 के आम चुनाव से अब तक हर चुनाव में विपक्ष के सामने अजेय रहे उत्तर प्रदेश में एक बार फिर 2022 के विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए बीजेपी अश्वमेघ यज्ञ करेगी। यह एक ऐसी रथयात्रा होगी जो चार दिशाओं से आरंभ होगी।


उत्तर प्रदेश चुनाव में भारतीय जनता पार्टी चरणबद्ध तरीके से अपनी ताकत झोंक रही है। सामाजिक सम्मेलनों और पार्टी के सदस्यता अभियान के बाद अब बारी है विजय संकल्प यात्रा की।


बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है और इसी के अनुसार चुनावी रणनीति को अंतिम रुप दिया जा रहा है।



अब बीजेपी कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्र स्तर पर लामबंद करने की तैयारी कर रही है। जिसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में एक बैठक की और राज्य के चार हिस्सों से 'विजय संकल्प यात्रा' आयोजित करने का फैसला लिया।


इस बैठक में उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह समेत पार्टी के अन्य सदस्य मौजूद रहे। यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बैठक के बाद बताया कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों से 'विजय संकल्प यात्रा' आयोजित करने का फैसला किया है। इस यात्रा के लिए चार प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं।


प्रदेश में चार दिशाओं से शुरु होने वाली रैलियों का समापन लखनऊ में होगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। किस यात्रा की शुरुआत कहां से होगी और किस रुट से वो आगे बढ़ेगी इस पर अभी योजना तैयार हो रही है।


इसके साथ साथ प्रदेश के छह क्षेत्रों में बूथ अध्यक्षों द्वारा एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें वहां व्यवस्थित पंजीकरण होना चाहिए।


बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 22-23 नवंबर तक यूपी के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य इकाई के अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे और चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अवध और काशी जा रहे हैं। 25 नवंबर को अवध क्षेत्र के सीतापुर और वाराणसी मंडल के जौनपुर में भी बूथ अध्यक्ष सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इन दोनों सम्मेलनों में वह मौजूद रहेंगे।



गृह मंत्री अमित शाह इन बूथ सम्मेलनों के लिए ब्रज और राज्य के पश्चिमी हिस्सों में जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना की अगुवाई में बनी घोषणापत्र समिति ने भी घोषणापत्र की रूपरेखा पर चर्चा के लिए लखनऊ में अपनी पहली बैठक की।


बीजेपी की नजर सभी पार्टियों के आ रहे संकल्प पत्रों और घोषणा पत्रों पर भी है। जिसमें पार्टियां अपनी अपनी तरह से मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह तरह के वादे-इरादे जता रही हैं। चूंकि बीजेपी इस समय सत्ता में है इसलिए उसके सामने चुनौती है कि वो विरोधियों के वादों की ना सिर्फ काट निकाले बल्कि स्वयं का घोषणापत्र कुछ ऐसे तैयार करे जिससे लोगों के बीच एंटी इंकंबैंसी का फैक्टर से भी पार पाया जा सके और विपक्ष की ओर से गिनाई जा रही मुफ्त की योजनाओं को भी धोखा करार दिया जा सके। साथ साथ बीजेपी अपने घोषणापत्र में सिर्फ विकास को गति देने की बात कह कर छुटकारा नहीं पा सकती।


टीम स्टेट टुडे



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