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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल की मंजूरी के साथ उतरे गहरे समुद्र में - अब होगा "सागर मंथन"



वो कथा तो आपने सुनी ही होगी जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया जिसमें चौदह रत्न निकले। जिसमें सबसे पहले हलाहल (विष) फिर कामधेनु गाय, उच्चै:श्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा नामक अप्सरा, देवी लक्ष्मी, वारूणी अर्थात मदिरा, चन्द्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धन्वन्तरि, अमृत प्रकट हुए।


आखिर में अमृत निकला जिससे देवता अमर हुए।


वर्तमान में कोरोना के चलते दुनिया को जान के लाले पड़े हैं। ऐसे में कोरोना मुक्ति का अमृत जब निकलेगा तब निकलेगा फिलहाल तो दुनिया भर में चौपट अर्थव्यवस्थाओं के चलते लोगों के सामने रोजी-रोटी और पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है।


ऐसे में जब जमीन पर जीवन की गति मंथर हो रही है समुद्र से उम्मीद बनी है।



गहरे समुद्र मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की हरी झंडी


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘गहरे समुद्र मिशन’ को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी। इससे समुद्री संसाधनों की खोज और समुद्री प्रौद्योगिकी के विकास में मदद मिलेगी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।


गहरे समुद्र में है अलग ही दुनिया


बैठक के प्रेस ब्रीफिंग में सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि गहरे समुद्र के तले एक अलग ही दुनिया है। पृथ्वी का 70 प्रतिशत हिस्सा समुद्र है। उसके बारे में अभी बहुत अध्ययन नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि सीसीईए ने 'गहरे समुद्र संबंधी मिशन' को मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे एक तरफ ब्लू इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी साथ ही समुद्री संसाधनों की खोज और समुद्री प्रौद्योगिकी के विकास में मदद मिलेगी। जावड़ेकर ने बताया कि समुद्र में 6000 मीटर नीचे कई प्रकार के खनिज हैं। इन खनिजों के बारे में अध्ययन नहीं हुआ है। इस मिशन के तहत खनिजों के बारे में अध्ययन एवं सर्वेक्षण का काम किया जाएगा।



जलवायु परिवर्तन और समुद्र का जलस्तर बढ़ने पर होगी रिसर्च


केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इसके अलावा जलवायु परिवर्तन एवं समुद्र के जलस्तर के बढ़ने सहित गहरे समुद्र में होने वाले परिवर्तनों के बारे में भी अध्ययन किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि गहरे समुद्र संबंधी मिशन के तहत जैव विविधता के बारे में भी अध्ययन किया जाएगा।


एडवांस मरीन स्टेशन की स्थापना होगी


प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि इसके तहत समुद्रीय जीव विज्ञान के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उन्नत समुद्री स्टेशन (एडवांस मरीन स्टेशन) की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा थर्मल एनर्जी का अध्ययन किया जाएगा।


विश्व के पांच देशों के पास गहरे समुद्र में खोज की प्रौद्योगिकी


जावड़ेकर ने बताया कि इस बारे में अभी दुनिया के पांच देशों अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान, चीन के पास ही प्रौद्योगिकी है। ऐसी प्रौद्योगिकी मुक्त रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस मिशन से खुद प्रौद्योगिकी के विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।



आपको बताते हैं क्या है ब्लू इकोनॉमी


भारत के कुल व्यापार का 90 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग के जरिए होता है। समुद्री रास्तों, नए बंदरगाहों और समुद्री सामरिक नीति के जरिये अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना ही ब्लू इकोनॉमी कहलाता है। भारत तीन ओर से सुमुद्र से घिरा हुआ है। ऐसे में ब्लू इकोनॉमी पर फोकस बढ़ाकर देश की आर्थिक ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है।


- साल 2010 में आई गुंटर पॉली की किताब 'The Blue Economy: 10 years, 100 innovations, 100 million jobs' में पहली बार ब्लू इकोनॉमी के कॉन्सेप्ट को महत्व मिला था। जिसमें निम्न बातें का उल्लेख हुआ -


- ब्लू इकोनॉमी के तहत अर्थव्यवस्था समुद्री क्षेत्र पर आधारित होती है। जिसमें पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डायनैमिक बिजनेस मॉडल तैयार किए जाते हैं।


- 'ब्लू ग्रोथ' के जरिये संसाधनों की कमी और कचरे के निपटारे की समस्या का समाधान किए जाने की कोशि‍श होती है।



- इसमें टिकाऊ विकास को भी सुनिश्चित किया जाता है ताकि बड़े पैमाने पर मानव कल्याण की ओर ध्यान दिया जाए।


- ब्लू इकोनॉमी के तहत समुद्र भी साफ-सुथरा रखा जाएगा ताकि बड़े पैमाने पर समुद्र से उत्पादन हो।


- इस वक्त ब्लू इकोनॉमी के तहत मुख्य फोकस खनिज पदार्थों समेत समुद्री उत्पादों पर है।


- ब्लू इकोनॉमी का कॉन्सेप्ट कहीं ज्यादा व्यापक है और इसमें समुद्री गतिविधियां भी शामिल हैं।



- ब्लू इकोनॉमी का ढांचा पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि बड़े -बड़े कारगो सामान समुद्री क्षेत्र में एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जा सकते हैं और वह भी ट्रकों या रेलवे की मदद के बिना। इस एजेंडे के तहत समुद्र में पर्यावरण के अनुकूल इंफ्रास्टक्चर तैयार करना होगा।


- वहीं ऐसे में कुछ इंफ्रास्टक्चर को समुद्र की ओर शि‍फ्ट करना अच्छी आर्थ‍िक और राजनीतिक रणनीति है. यह भारत में मुमकिन भी है।


- नीति आयोग ने देश की इकोनॉमी को नई दिशा देने का काम किया है। इस योजना के तहत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और लंबी समुद्री सीमाओं का भरपूर इस्तेमाल करते हुए देश को 'ब्लू इकोनॉमी' के तौर पर खड़ा करना है।


- भारत के कुल व्यापार का 90 फीसदी समुद्री मार्ग से ही होता है. ऐसे में ब्लू इकोनॉमी का दोहन भारत के लिए सामरिक नजरिये से फायदेमंद है।


टीम स्टेट टुडे


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