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मुस्लिमों को रिझाने व रामभक्तों के अपमान के लिए सियासी सनसनी बनाया गया राममंदिर जमीन सौदा- खुलासा



राम मंदिर के निर्माण में सैकड़ों साल तक अड़ंगे लगते रहे। ढांचा गिरने के बाद लंबे समय तक मामला अदालत में पेंडिंग रहा। मंदिर विरोध की आड़ में सियासत करने वालों ने ना सिर्फ मुसलमानों को संतुष्ट करने की भरसक कोशिश की बल्कि काफी हद तक इसमें कामयाब भी रहे।


सत्ता के दलालों ने काला कोट पहन कर ऐसी ऐसी दलीलें रखीं जिससे पूरा हिंदू समाज अपमानित हुआ। खून का घूंट पीकर सब कुछ बर्दाश्त करते हुए वो शुभ दिन आया जब देश की सर्वोच्च अदालत ने माना कि अयोध्या में श्रीराम का ही मंदिर था और वही वहां विराजमान होंगे। मुस्लिम आंक्रांताओं ने भारत में अलग अलग स्थानों पर जिस तरह हिंदू धर्म स्थल तोड़े उसी तरह अयोध्या में पुरातन श्रीराम जन्मभूमि पर भी मंदिर तोड़ा और इस्लामी ढांचा खड़ा करने का प्रयास किया। लेकिन अदालत के ही आदेश पर पुरातत्व विभाग की खुदाई में सच धरती फाड़ कर बाहर निकला।


अब जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण आरंभ हो चुका है तो ऐसे राजनीतिक दल जो मुसलमानों के दम पर ही राजनीति का तानाबाना बुनते हैं उन्होंने एक बार फिर हिंदु जनमानस की भावनाओं से खेल कर उन्हें अपमानित करने और मुस्लिम वोटरों को रिझाने का सियासी सनसनीखेज षडयंत्र किया है।



क्या है मामला


मीडिया में अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक साथ ही सोशल मीडिया पर भी प्रचारित किया गया कि अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करा रहे श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दो करोड़ की जमीन महज कुछ मिनटों में 18.50 करोड़ में खरीदी। जबकि हकीकत बहुत अलग है।


सबसे पहले आपको बताते हैं कि जमीन सौदे का चर्


मीडिया के सामने जब राजनीतिक दलों की तरफ से श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर आरोप लगाए गए तो एक बड़ी सच्चाई जानबूझकर छिपा ली गई जो इस पूरे मामले में अहम कड़ी है और उसका जिक्र ना करने से ही भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।

ऑनलाइन रजिस्ट्री दस्तावेज अपलोड किए जाने वाले दिन 18 मार्च 2021 को एक ही पेज पर दो नहीं तीन एंट्री दर्ज है।


सबसे पहले कुसुम पाठक और हरीश कुमार पाठक उर्फ बाबा हरिदास आदि के विक्रय विलेख अनुबंध के निरस्तीकरण की जानकारी और दस्तावेज अपलोड है।


यानी उपरोक्त दोनों विक्रेताओं ने अपनी जमीन का पहले सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को एग्रीमेंट कर रखा था।


चंद मिनट पहले एग्रीमेंट अनुबंध निरस्त हुआ। इसके बाद एग्रीमेंट कराने वालों के पक्ष में रजिस्ट्री हुई।

इसके बाद रजिस्ट्री कराने वाले पक्ष ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को कब्जा करने के साथ रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया।



पूर्व में किए गए एग्रीमेंट का सत्य


जब उस एग्रीमेंट की जांच की गई जिसका जिक्र पूरे प्रकरण में किया ही नहीं गया तो सच सामने आया। एग्रीमेंट अनुबंध की जांच से ये बात स्पष्ट हो गई कि 2 करोड़ 16 लाख में वर्ष 2017 में 92 लाख पेशगी देकर जमीन का एग्रीमेंट किया गया था।


साफ है कि उक्त जमीन का मूल्य 2017 के उस समय का था जब राममंदिर को लेकर मामला अदालत में था और कोई फैसला नहीं आया था। ये वो दौर था जब अयोध्या साल के छ महीने एक तरह की बंदी ही झेलती थी जिसमें 6 दिसंबर से लेकर रामनवमी समेत तमाम तीज त्यौहार थे। ये वो दौर था जब अयोध्यावासी कैलेंडर की तारीखों को देखकर संशय, डर और दहशत के साए में चले जाते थे।



क्या ट्रस्ट ने सौदे में नुकसान उठाया


मामले पर जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बाग बिजैसी मोहल्ले में जो जमीन खरीदी है वह काफी महत्वपूर्ण स्थान पर है। ठीक इसी के सामने अयोध्या रेलवे स्टेशन का मुख्य द्वार बनना है। नए प्लान में यह इलाका सबसे बड़ा व्यावसायिक हब बनेगा। भक्तों की सुविधाओं के लिए ट्रस्ट के प्लान का स्वागत होना चाहिए। राम मंदिर की भव्यता और विस्तार में धन की कमी आड़े नहीं आएगी।


डेढ़ साल पहले राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां जमीन के दाम 10 गुना से ज्यादा बढ़ चुके हैं। बाग बिजैसी मोहल्ले में ट्रस्ट की ओर से खरीदा गया भूखंड ठीक उस स्थान पर है, जहां नए प्लान में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मॉडल जैसा बन रहे अयोध्या रेलवे स्टेशन का मुख्य द्वार प्रस्तावित है। दो करोड़ की जमीन को 18.50 करोड़ में खरीदने वाला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अभी भी फायदे में है। असलियत यह है कि दो करोड़ की रजिस्ट्री 4 साल पहले हुए एग्रीमेंट पर आधारित थी तब राम नगरी में साल के 6 महीने संगीनों के साए में गुजरते थे।


आरोप लगने के बाद ट्रस्ट ने क्या किया


ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की ओर से ट्रस्टियों समेत शासन और सत्ता के शीर्ष तक मार्केट वैल्यू से तुलना करती हुई एक रिपोर्ट रविवार की देर रात ही भेज दी गई। ट्रस्ट ने यह भी एलान किया है कि राम मंदिर के विस्तार में चाहे जितनी महंगी जमीन मिलेगी, उसे खरीदने से पीछे नहीं हटेगें। इसके साथ ही महासचिव चंपत राय की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए जमीन का सच देश के सामने भी रखा गया।



कैसे आरोप जड़े समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने


आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह और सपा के पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने हरीश कुमार पाठक उर्फ बाबा हरिदास व पत्नी कुसुम पाठक के जरिए दो करोड़ में भूखंड गाटा संख्या 243, 244 और 246 रकबा 12080 वर्ग मीटर यानी 129980.8 वर्ग फिट को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेचने के 10 मिनट बाद 18:50 करोड़ में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बेचकर बड़े घोटाले का संगीन आरोप लगाया है।


इस आरोप में उस एग्रीमेंट का जिक्र नहीं किया गया जो 2017 में किया गया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट से 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में आए फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहली बार भूखंड खरीद को लेकर विवादों से लपेटने की कोशिश की गई।


क्या बोले श्रीराम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का


श्री राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप सियासी लाभ लेने वाला है, इसका सच्चाई से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। ट्रस्ट ने जो जमीन ली है, उसकी मार्केट वैल्यू मौके पर आकर विरोधी जांच कर लें तो मुंह पर ताला लग जाएगा। ट्रस्ट ईमानदारी से अयोध्या के सांस्कृतिक विकास में लगा हुआ है।



मुस्लिम-यादव गठजोड़ वाले प्रापर्टी डीलर गढ़ रहे हैं कहानियां


पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में प्रापर्टी डीलिंग का धंधा खूब चमका। जमीनों पर अवैध कब्जें हो या अवैध को वैध बनाकर बैनामा-बट्टा। हर स्तर पर जम कर धांधली हुई। प्रापर्टी डिलिंग के धंधे में मुसलमानों ने अलग अलग सरकारों में प्रभावशाली जातियों के नेताओं के साथ ना सिर्फ सरकारी और प्राइवेट जमीनों की खरीद फरोख्त के साथ साथ कब्जे किये बल्कि मोटा मुनाफा काटते हुए आम लोगों को खूब चूसा।


ऐसे ही जमीन खरीद-फरोख्त के कारोबार से जुड़े एक मुस्लिम प्रापर्टी डीलर का कहना है कि बताते हैं कि जिस भूखंड को ट्रस्ट ने लिया है वह कभी हाजी फैक की हुआ करती थी, उनको कोई औलाद नहीं थी तो वक्फ बोर्ड को देने का निर्णय लिया गया। बाद में जो बोर्ड में प्रभावी थे, उन्होंने इसे प्राप्त करके तमाम लोगों को बेचना शुरू किया।


उन्हीं से हरीश पाठक ने बहुत सस्ते दाम पर खुद व पत्नी के नाम कई जमीन खरीदी थीं, इसके एक हिस्से में कई लोगों के एग्रीमेंट के बाद 2017 का एग्रीमेंट चल रहा था। हालांकि 3 साल में यह भी नियमानुसार समाप्त हो जाना चाहिए था जो नहीं हुआ।



इस पूरे मामले में सुल्तान अंसारी जिससे ट्रस्ट ने रजिस्ट्री की है वो खुद भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ चुका है। अयोध्या में कई जमीनों पर इसका कब्जा है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद इसने पाठक परिवार को डरा धमका कर एग्रीमेंट बरकरार रखवाया ताकि ट्रस्ट से बड़ी रकम ऐंठ सके। दूसरी तरफ सामान्य तरीके से गुजर बसर करने वाला ब्राह्मण पाठक का परिवार अंसारी की धमकियों से डर कर और श्रीराम मंदिर के कार्य में किसी प्रकार की बाधा ना पड़े इस भाव से जो मिला उसी में संतोष करते हुए रजिस्ट्री कर चुपचाप बैठ गया।


इसमें दोराय नहीं है कि आम आदमी पार्टी हो, कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी इन तीनों ने ही मुसलमानों को रिझाने और उनका वोट हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन्हें मुसलमानों का वोट लंबे समय से मिलता भी रहा है और आगे भी मिलता रहे ये इसी की लड़ाई है।


चूंकि रामलला हर कष्ट से मुक्त हो चुकें हैं, अदालत के फैसले के बाद वो टेंट से निकलकर अस्थाई निवास पर रहने भी लगे हैं और इंतजार कर रहे हैं कि उनका मंदिर शीघ्र ही बन कर तैयार हो जिसमें कुछ वर्ष लगेंगे। इस बीच 2022 में उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव होगा। जिसमें भारतीय जनता पार्टी इस बात को पुरजोर तरीके से रखेगी कि केंद्र और राज्य में उसकी सरकार रहते अदालत का फैसला आने के बाद तेजी से मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है।


अगर एक बार फिर हिंदू जनमानस एक हुआ और योगी सरकार के कामकाज से प्रसन्न होकर बीजेपी के पक्ष में वोट किया तो विपक्ष की हालत खराब हो सकती है। इसलिए 2022 के चुनाव में बीजेपी की सबसे अहम उपलब्धि यानी राममंदिर निर्माण पर आरोप प्रत्यारोप के दौर चलाकर ना सिर्फ हिंदू जनमानस की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है बल्कि मुसलमानों को रिझाने का भी खेल चल रहा है।



आरोप लगाने वालों पर होगा मानहानि का मुकदमा


श्री हनुमान गढ़ी के मुख्य पुजारी राजू दास और विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि राम, राममंदिर, विहिप और हिंदू जनमानस पर कुठाराघात और अपमानित करने वाली टिप्पणियां और षडयंत्र पहले भी होते रहे हैं। अब तक ऐसे आरोप लगाने वालों को माफी मांगने पर हिंदू समाज क्षमादान दे देता था लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। इस बार मानहानि करने वालों को दंड भुगतना होगा।


श्री हनुमान गढ़ी के मुख्य पुजारी राजू दास ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह पर पचास करोड़ की मानहानि का मुकदमा ठोंका जाएगा।


टीम स्टेट टुडे



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