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कांग्रेस की यात्रा में मुस्लिमों के उत्साह से SP-BSP में बैचेनी


शामली, 06 जनवरी 2023 : कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा प्रभावशाली दिख रही है। यात्रा की भीड़ से राहुल गांधी का ग्राफ बढ़ने की गुंजाइश बनी है। भीड़ को देखकर नेता गदगद जरूर है, लेकिन इस भीड़ को वोट में बदलना कांग्रेस के दिग्गजों के सामने चुनौती भरा साबित होगा। भाजपा जमीन से जुड़कर जिस तरह से काम करती रही है, उससे साफ है कि भारत जोड़ो यात्रा की भीड़ को वोट में बदलना आसान नहीं है। उधर, कांग्रेस के दिग्गजों का मानना है कि यह यात्रा देश को जोड़ने, नफरत को तोड़ने का संदेश देने के लिए है।

भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी नई ऊर्जा, नए जोश, नए अंदाज और नए लुक में दिखाई दिए। जिले में उनकी दस्तक वैसे तो कई बार हो चुकी है, लेकिन इस बार युवा, महिला, पुरुषों, बुजुर्गों में उनके लिए हमदर्दी दिखाई दी। खासतौर से मुस्लिम वर्ग का रूझान राहुल गांधी की ओर देखने को मिला। सड़क से लेकर छतों तक उन पर पुष्पवर्षा का सिलसिला जिले से हरियाणा तक जगह-जगह होता रहा। यात्रा में भीड़ को देखकर दिग्गज खुद की पीठ थपथपाते जरूर रहे, लेकिन यह भीड़ मतदान तक बरकरार रहेगी। यह बड़ा सवाल है।

वजह किसी से छिपी नहीं है। जिस तरह भगवा बिग्रेड आमजन खासतौर से हिंदू समुदाय के प्रत्येक वर्ग के मन-पटल पर छाप छोड़े हुए है वह कांग्रेस की राह को और मुश्किल कर सकती है। मोदी-योगी का जादू उन पर छाया है। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार समेत विभिन्न मुद्दों को कांग्रेस व विपक्षी दल पहले भी भाजपा के खिलाफ उठाते रहे। विस चुनाव-2022 में भी यह मुद्दे रहे, लेकिन जब चुनाव परिणाम आए तो फिर भगवा खेमा उत्साह से भर गया। प्रेसवार्ता में पूर्व केंद्रीय मंत्री का यह कहना कि उनकी विचारधारा है, इससे चुनाव का मसला नही है। नफरत, देश को जोड़ने और जनता के साथ समेत अन्य मामलों में विचारधारा आगामी पांच से 15 साल तक भी कांग्रेसी लगे रहेंगे। कुल मिलाकर यात्रा की भीड़ के आगे यह चुनौती बड़ी है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।

सपा-बसपा में दिखी बैचेनी

बसपा व सपा खेमे में खासतौर से बैचेनी दिखी। बसपा सपा यात्रा के पक्ष में रहे, लेकिन सपा का कोई बड़ा नेता दिखाई नहीं दिया। बसपा की ओर से भी दूरी रही। कांगेस की यात्रा में जिस तरह से मुस्लिम वर्ग दिखा और अनेकों स्थान पर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के चित्र हाथ में लिए लोग दिखे। प्रेसवार्ता में परिचय के दौरान जय भीम से शुरूआत हुई। इससे चिंता जायज भी हैं।

रालोद के गढ़ में अनदेखी न पड़ जाए भारी

शामली जिला रालोद का गढ़ माना जाता है। जाटलैंड में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को पूजा जाता है। वहीं चौधरी अजित सिंह के बाद ही जयंत चौधरी का यहां से गहरा नाता है। 80 के दशक में रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की दादी गायत्री देवी सांसद रही हैं। रालोद के तीन बार सांसद रह चुके हैं। इनमें पहली बार अमीर आलम खां, दूसरी बार अनुराधा चौधरी, जबकि तीसरी बार सपा की तब्बसुम हसन ने रालोद के सिंबल पर भी जीत हासिल की। वर्तमान में जिले की तीन सीटों में दो रालोद के विधायक हैं। अन्य जिलों से भी रालोद विधायक यहां पहुंचे, लेकिन राहुल का यहां रूककर चौधरी चरण सिंह प्रतिमा पर माल्यार्पण न करना लोगों को नागवार गुजरा है।

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