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चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक खेलने की तैयारी में गहलोत


राजस्थान, 11 सितंबर 2023 : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा चुनाव से पहले हर वर्ग को खुश करने में जुटे हैं। अब अनुसूचित जाति (एससी)और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग को साधने के लिए गहलोत इन दोनों वर्गों का आरक्षण दो-दो प्रतिशत बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

आरक्षण दो प्रतिशत बढ़ाने की तैयारी

सीएम के निर्देश पर एससी और एसटी का आरक्षण दो-दो प्रतिशत बढ़ाने को लेकर अधिकारी प्रस्ताव तैयार करने में जुटे हैं। विधि विशेषज्ञों की भी सलाह ली जा रही है। कांग्रेस की रणनीति है कि चुनाव की आचार संहिता घोषित होने से पहले आरक्षण बढ़ाने की घोषणा कर दी जाए।

एससी को 18 और एसटी को मिलेगा 14 प्रतिशत आरक्षण

वर्तमान में प्रदेश में एससी को 16 और एसटी को 12 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। यदि दो-दो प्रतिशत बढ़ाने का फैसला होता है तो एससी को 18 और एसटी को 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। गहलोत सरकार का तर्क है कि एससी,एसटी के विभिन्न संगठन जाति के आधार पर आरक्षण बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस कारण सरकार आरक्षण बढ़ाने पर विचार कर रही है।

हालांकि, इस घोषणा पर अमल हो सकेगा या नहीं इसको लेकर संशय है। सीएम गहलोत ने पिछले महीने में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बांसवाड़ा मे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। लेकिन इस घोषणा पर अब तक अमल नहीं हो सका है। गहलोत ने प्रदेश स्तर पर जातिगत जनगणना करवाने की बात भी कही है।

यह है राजनीतिक गणित

राजस्थान की दो सौ विधानसभा सीटों में से एससी के लिए 34 और एसटी के लिए 25 विधानसभा सीटें आरक्षित है। साथ ही 50 सीटों पर एससी की आबादी 20 प्रतिशत के करीब है। करीब दो दर्जन सीटों पर एसटी की आबादी 20 प्रतिशत है। वहीं लोकसभा की 25 सीटों में से चार एससी व तीन एसटी के लिए आरक्षित है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में जनसंख्या के लिहाज से 15 प्रतिशत से अधिक एससी और 14 प्रतिशत एसटी हैं। एसटी में से उदयपुर संभाग की 17 सीटों पर आदिवासियों का प्रभाव है। आदिवासियों में भारतीय ट्राइबल पार्टी और भारतीय आदिवासी पार्टी सक्रिय है।

इन क्षेत्रों में करीब एक दशक पहले तक कांग्रेस का प्रभाव था, लेकिन आदिवासियों ने पिछले चुनाव में खुद की पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा, जिसका नुकसान कांग्रेस को हुआ। अब आरक्षण बढ़ाकर कांग्रेस सरकार इस वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है।

यह है आरक्षण का गणित

वर्तमान में प्रदेश 21 प्रतिशत ओबीसी,16 प्रतिशत एससी,12 प्रतिशत एसटी,10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस और 5 प्रतिशत एमबीएस (अति पिछड़ा वर्ग) को आरक्षण मिल रहा है। इस तरह कुल 64 प्रतिशत आरक्षण है।सीएम ने पिछले दिनों ओबीसी आरक्षण 6 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा की है।

अब दो-दो प्रतिशत एससी और एसटी का आरक्षण बढ़ाने की तैयारी है। यदि इस पर फैसला होता है तो प्रदेश में कुल आरक्षण 74 प्रतिशत हो जाएगा। वर्तमान में देश में सबसे अधिक 82 प्रतिशत आरक्षण छत्तीसगढ़ में है। तमिलनाडु में 69 और हरियाणा,बिहार व केरल में 60-60 प्रतिशत आरक्षण है।

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