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हिमंत बिस्वा सरमा होंगे असम के नए मुख्यमंत्री, चुने गए बीजेपी विधायक दल के नेता




हिमंत बिस्वा सरमा असम के अगले मुख्यमंत्री होंगे। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद बीजेपी के भीतर चल रहे संस्पेंस पर विराम लग गया। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नरेंद्र सिंह तोमर ने इसकी जानकारी दी है। इससे पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यपाल जगदीश मुखी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। असम में भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले ही सर्बानंद सोनोवाल ने अपना इस्तीफा दिया। सोनोवाल सरकार में सरमा असम के स्वास्थ्य मंत्री थे।


हिमंत बिस्व सरमा सोमवार अपराह्न 12 बजे मंत्रिमंडल के साथ शपथ लेंगे।



कैसे घूमा घटनाक्रम


सर्बानंद सोनोवाल और हेमंत बिस्वा को भाजपा आलाकमान ने मीटिंग के लिए दिल्ली बुलाया था। दोनों नेताओं की कल दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हुई थी, जहां असम के नए मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर लंबी चर्चा हुई।


असम में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा ने केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी महासचिव अरुण सिंह को नामित किया था। इसके अलावा पार्टी के संसदीय बोर्ड ने तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। जबकि बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।


चुनाव के दौरान संस्पेंस था सीएम का चेहरा


दरअसल 2016 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पहले ही सोनोवाल को सीएम पद का दावेदार घोषित किया था। उन्होंने जीत हासिल कर पहली बार किसी उत्तर पूर्वी राज्य में भगवा सरकार गठित की थी। इस बार गुटबाजी खत्म करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने किसी को सीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके चलते इससे यह संकेत गया कि चुनाव के बाद सोनोवाल की जगह हिमंत को भी मौका दिया जा सकता है।



असम में बीजेपी ने जीतीं 60 सीटें


126 सीटों वाली विधानसभा में, बीजेपी ने 60 सीटें जीतीं। उसके गठबंधन सहयोगी असोम गण परिषद (एजीपी) ने नौ सीटें जीतीं और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने छह सीटें जीतीं।


दूसरे स्थान पर रही कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने 16 सीटें जीतीं। बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने चार सीटें जीती थीं।


सोनोवाल असम के मूल आदिवासी समुदाय सोनोवाल-काछरी से आते हैं, जबकि सरमा उत्तर पूर्व लोकतांत्रिक गठबंधन के समन्वयक हैं, जो भाजपा की उत्तर पूर्वी राज्यों में सफलता का आधार है। ऐसे में दोनों का ही दावा मजबूत माना जा रहा था।



सोनोवाल और सरमा के बीच कौन कहां खड़ा था


गुरुवार को दिल्ली में अमित शाह के निवास पर भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्यों की अनौपचारिक बैठक हुई थी। बैठक में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में असम के क्षेत्रीय प्रभारी के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वोत्तर प्रभारी ने सोनोवाल का समर्थन किया था। साथ ही संसदीय बोर्ड के दो वरिष्ठ सदस्यों ने भी सोनोवाल का पक्ष लिया।


उधर, हिमंत के पक्ष में इस बार जीतने वाले कम से कम तीस विधायकों के अलावा दोनों सहयोगी दल एजीपी और यूपीपीएल खड़े हैं। साथ ही पूर्वोत्तर के तीन अन्य राज्यों में हिमंत की गहरी पकड़ को देखते हुए भी पार्टी नेतृत्व उन्हें नाराज करने की स्थिति में नहीं है।


इससे बड़ी पूंजी नहीं हो सकती : तोमर


असम में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि चुनाव में हमारी सरकार की लोकप्रियता पूरी तरह बरकरार थी। सीएम और मंत्रियों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करता था। 5 साल सरकार चलाने के बाद अगर हमारी विश्वसनीयता स्थिर रहती है तो किसी भी राजनीतिक दल के लिए इससे बड़ी पूंजी नहीं हो सकती।


टीम स्टेट टुडे



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