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हलक में हाथ डाल कर निकाला जा रहा है कालाधन, ईडी ने बैंकों को लौटाई पहली किश्त



रिपोर्ट - आदेश शुक्ला


देश के बैंकों से धन लेकर भागे विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी पर एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है। भगोड़ों के हलक में हाथ डाल कर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी भारत का धन वापस ला रहा है।


ईडी की अब तक की कार्रवाई में इन लोगों की 18,170.02 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई। इसमें से 9,371.17 करोड़ रुपये के एसेट्स बैंकों और केंद्र सरकार को ट्रांसफर कर दिए गए हैं।


बैंकों को ट्रांसफर हुई ये रकम जब्त की गयी संपत्ति का सिर्फ एक हिस्सा भर है यानी पहली किश्त।


ईडी का कहना है कि विजय माल्या और पीएनबी बैंक धोखाधड़ी मामलों में बैंकों की 40 फीसदी राशि PMLA के तहत जब्त शेयरों की बिक्री के जरिए वसूली गई।


इन तीन भगोड़ों ने भारत के बैंकों से बड़ी रकम की हेराफेरी करके कुल 22,586 करोड़ रुपयों का चूना लगाया था।


जिसमें मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ करीब 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।


नीरव मोदी अभी लंदन की एक जेल में बंद है। चोकसी और नीरव दोनों सीबीआई के भी रडार पर हैं। दोनों की जांच जारी है।


दूसरी तरफ विजय माल्‍या ने SBI समेत अन्य बैंकों से करीब 9000 करोड़ से ज्‍यादा हड़पे थे। ये धोखाधड़ी बैंक लोन के नाम पर हुई थी।


आपको बता दें कि ईडी ने तीनों भगोड़ों की जो संपत्ति जब्त की है वो कुल घोटाले की रकम की 80 फीसदी है। शेष 20 फीसदी की रकम के लिए सीबीआई और ईडी लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसी उम्मीद है कि तीनों के भारत प्रत्यर्पण के साथ ही पूरी रकम की वापसी भी सुनिश्चित हो जाएगी।



नीरव मोदी को अदालत से झटका


पीएनबी घोटाले में वांछित हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन के एक हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। पंजाब नेशनल बैंक से संबंधित दो अरब डॉलर के कथित घोटाले में नीरव की प्रत्यर्पण रोकने संबंधी याचिका ब्रिटेन के एक हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक नीरव मोदी भारत को प्रत्यर्पण के खिलाफ अपनी अपील के पहले चरण में हार गया है।


अब 50 वर्षीय हीरा कारोबारी के लिए हाईकोर्ट में संक्षिप्त मौखिक सुनवाई के नए सिरे से अपील करने का मौका बचा है। आपको बता दें ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने अप्रैल में नीरव मोदी को नई दिल्ली को प्रत्यर्पित किए जाने का आदेश दिया था।


क्या है नीरव मोदी का घोटाला


अरबपति भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी और उसके साथियों ने साल 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने को लाइन ऑफ क्रेडिट के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच से संपर्क साधा। आम तौर पर बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए LoU यानी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करता है, लेकिन पीएनबी बैंक के कुछ कर्मचारियों ने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखकर कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी LoU जारी किया। इतना ही नहीं साजिश रचने वाले अधिकारियों ने सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन का गलत इस्तेमाल करते हुए नीरव और मेहुल चोकसी को फंड जारी करने की हरी झंडी दे दी।


कैसे और कब हुआ खुलासा


नीरव मोदी के घोटाले का खुलासा सात साल बाद उस वक्त हुआ जब ये भ्रष्ट अधिकारी रिटायर्ड हो गए और नीरव मोदी की कंपनी ने जनवरी 2018 में दोबारा इसी तरह की सुविधा शुरू करने की गुजारिश की। नए अधिकारियों ने फर्जीवाड़े को पकड़ा और घोटाले की जांच से पर्दा हटाने के लिए जांच शुरू की। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक ने जनवरी 2018 में पहली बार नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और उनके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सीबीआई ने नीरव मोदी, उनकी पत्नी, भाई, भांजा और कारोबारी साझेदार के खिलाफ मामले की जांच शुरू की, जिसमें आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा।


2011 और 2014 में यूपीए सरकार के दौरान इस पूरे घोटाले में कांग्रेस नेता और तत्कालीन वित्तमंत्री पी.चिदंबरम की भी अहम भूमिका थी। माल्या और नीरव मोदी, मेहुल चौकसी के कांग्रेस नेताओं खासकर चिदंबरम से गहरे ताल्लुकात थे। जानकारी के मुताबिक वित्तमंत्री रहते हुए चिदंबरम ने इन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सिर्फ चौबीस से अड़तालीस घंटों के लिए भारत सरकार के कुछ कानून में ढील दे दी थी। जिससे इन्हें अरबों रुपयों का मुनाफा हुआ था।


टीम स्टेट टुडे


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