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कालीदास मार्ग पर निकले मुख्यमंत्री के काफिले से “हवा” बदली भी और निकली भी



राजनीति हवा में नहीं होती, लेकिन, सियासी हवा को पहचानना, राजनीति को हवा देना और राजनीति के मुद्दे की हवा निकाल देना ये सब इतना आसान नहीं भी नहीं होता।


आसान होता तो जो आज हुआ वो कब का हो गया होता।


5 कालीदास मार्ग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का स्थाई पता है। यहां प्रदेश का मुखिया ही रहता है। जब जब यहां से सीएम की फ्लीट निकलती है कुछ बड़ा और कई बार बहुत बड़ा होता है। जो आज हुआ वो कई लोगों के लिए अप्रत्याशित था। कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें बखूबी पता था और पता है कि जो हुआ वो क्यों हुआ और आगे क्या होने वाला है। फिर भी जो हुआ उसकी उंचाई बहुत है। जिनके बीच हुआ वो खिलाड़ी भी बहुत ऊंचे हैं।



मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने करीब साढ़े साल बाद जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला 5 कालीदास मार्ग से बाहर निकला और सात कालीदास मार्ग तक गया तो वो हो गया जिसका अंदाजा तो छोड़िये बहुतों ने तो सपने में भी नहीं सोचा होगा।


आपको बता दें कि सात कालीदास मार्ग उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का सरकारी निवास है। मुख्यमंत्री के निवास 5 केडी (कालीदास मार्ग) और 7 केडी के बीच फासला तो महज कुछ मीटर का है लेकिन पहुंचने में साढ़े चार साल लग गए।



उत्तर प्रदेश चुनावी मुहाने पर खड़ा है। ऐसा देखा गया है कि सत्ताधारी दल के भीतर चुनाव से छ आठ महीने पहले सिरफुटौव्वल शुरु होती है और चुनाव हारने तक जारी रहती है।


ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी में असंतोष नहीं है या खेमेबंदी नहीं है। ये राजनीति की स्वाभाविक प्रक्रिया है और बीजेपी में भी है। फर्क सिर्फ इतना है कि ये पार्टी के जिन बड़े नेताओं के बीच दिखाई या बताई जा रही है वो दोनों इतने मंझे हुए हैं कि अपने हाथ से विपक्ष को राजनीति का मौका तो देने से रहे।



दरअसल 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही एक संदेश ये भी गया कि केशव प्रसाद मौर्या जो मुख्यमंत्री बन सकते थे या बनना चाहिए था उन्हें उप मुख्यमंत्री के पद से ही संतोष करना पड़ा।


सियासी महत्वाकांक्षा होने में कोई बुराई भी नहीं लेकिन अगर तिल का ताड़ बन जाए तो ये ना पार्टी के लिए ठीक होता है ना ही उन व्यक्तियों के लिए जिनके बीच ये स्थितियां पैदा हुई हों या की गई हों।



ऐसे में चाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, दोनों ने ही गजब के संयम और समन्वय के साथ ना सिर्फ सरकार चलाई बल्कि गाहेबगाहे ऐसी फुलझड़ियां भी छोड़ते रहे जिससे विपक्ष को सियासत का कोना नहीं मिला।


राजधानी लखनऊ के लिए आज का दिन वैसे भी बहुत खास है। आज चौथा और आखिरी बड़ा मंगल है। अब सीएम हों या डिप्टी सीएम दोनों बजरंगबली के भक्त हैं इसमें किसी को कोई शक नहीं। इसलिए जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने निवास से निकल कर केशव प्रसाद मौर्या के घर पहुंचे तो पूरी सियासत ही घूम गई।



उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के घर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों और आरएसएस के बड़े पदाधिकारियों के साथ दोपहर का भोजन भी किया।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होशबोले और सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल और क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह समेत कुछ और पदाधिकारी भी मौर्य के आवास पर लंच में थे।


इस प्रक्रिया से दो तरह के संदेश निकले।


पहला पार्टी के भीतर ये संदेश कि पार्टी के शीर्ष नेता एक हैं और सब मिलकर 2022 में भारतीय जनता पार्टी को फिर से सत्ता में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संघ पर्दे के पीछे से हमेशा की तरह सब देख रहा है और अपना काम कर रहा है।



दूसरा संदेश पार्टी से बाहर विपक्षियों को दिया गया। वो ये कि चुनाव मुद्दों पर ही होगा जिसके लिए सरकार और संगठन दोनों पूरी तरह तैयार हैं। फिजूल के आरोप-प्रत्यारोप कहीं ठहरेंगे नहीं।


इसी दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने केशव प्रसाद मौर्य के बेटे की शादी की बधाई का शिष्टाचार भी पूरा किया। माना जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ का केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास पर जाना उत्तर प्रदेश भाजपा तथा प्रदेश में एक जुटता का संदेश देने की कोशिश है। वहां पर सीएम योगी आदित्यनाथ करीब डेढ़ घंटा तक रहे।


इससे पहले सोमवार की रात ही भाजपा की कोर कमेटी की बैठक सीएम के सरकारी आवास में हुई थी। इसमें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह भी शामिल हुए थे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार के विकास कार्यों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े कामों के सहारे ही चुनाव मैदान में उतरेगी।



बीते दिनों केशव मौर्य ने बयान दिया था कि यूपी में मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के बाद तय किया जाएगा जिस पर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था और पार्टी नेतृत्व के मुद्दे पर बंटी नजर आ रही थी। इस दौरे से योगी ने पार्टी में एकता का संदेश दिया है।


इसके पहले, सोमवार को पूर्व नौकरशाह अरविंद कुमार शर्मा ने भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को पत्र लिखकर उपाध्यक्ष बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया था। पत्र में उन्होंने संदेश दिया था कि यूपी का चुनाव 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा था कि योगी जी के नेतृत्व में भाजपा 2017 से भी बड़ी सफलता इस बार के चुनाव में दर्ज करेगी।



फिलहाल बीजेपी यूपी के चुनाव को लेकर पूरी गंभीरता से रणनीति बनाने में जुटी है। पार्टी जुलाई से पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में कूदने की तैयारी कर रही है।


टीम स्टेट टुडे


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