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“आरक्षण” – बचेगा या जाएगा, रोहिणी आयोग के आंकड़ें देखे आपने!



भारत में आरक्षण का मसला बर्रैया का छत्ता है। बड़ी से बड़ी सरकार इस पर हाथ लगाने से हिचकती है। ये भी सच है कि आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद देश के बड़े तबके को इसका फायदा भी मिला है। पिछड़े और वंचितों की ना सिर्फ देश की उन्नति में भागीदारी बढ़ी बल्कि उनकी हिस्सेदारी से सामाजिक व्यवस्था में भी आमूलचूल परिवर्तन आए।


भारत में आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को दिया गया है। इन श्रेणियों में ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग को दिए जाने वाला आरक्षण कई बार जरुरत से ज्यादा सियासी लक्ष्यों को साधने के लिए दिया गया।


समय समय पर भारत में लागू आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की भी मांग उठी लेकिन विभइन्न सरकारों ने ठोस कदम उठाने के बजाय कदम इतने ठोस कर लिए कि पूरा मसला ज्यों का त्यों रह गया।


अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण के श्रेणीकरण को लेकर रोहिणी आयोग का गठन किया गया था। सामाजिक रुप से ज्यादा राजनीतिक रुप से संवेदनशील इस मुद्दे पर फिलहाल कोई जल्दबाजी में नहीं है लेकिन आयोग ने जो आंकड़े जुटाए हैं वे चौंकाने वाले हैं।


आयोग के आंकड़ों के मुताबिक ओबीसी में शामिल एक हजार से ज्यादा ऐसी जातियां हैं, जिन्हें इस आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। आयोग अब इन्हीं तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर राज्यों के साथ निर्णायक चर्चा की तैयारी में है।



कितने राज्यों के साथ होगी चर्चा


आयोग ने आने वाले समय में देश के 11 राज्यों के साथ चर्चा शुरू करने की योजना बनाई है। इन राज्यों में पहले से ही अलग-अलग आधार पर ओबीसी आरक्षण का बंटवारा हो चुका है। बड़ी बात यह है कि इन राज्यों में आरक्षण कोटे का बंटवारा किसी एक तय फार्मूले पर नहीं बल्कि वोट बैंक के लिहाज से किया गया है। ऐसे में किसी राज्य में इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है, तो किसी राज्य में तीन, चार और पांच श्रेणियों तक इसका बंटवारा किया गया है।


किस आधार पर होगी चर्चा


रोहिणी आयोग का मानना है कि जुटाए गए आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर ओबीसी आरक्षण के उप-वर्गीकरण (सब-कैटेगराइजेशन) के पक्ष में है। राज्यों के साथ चर्चा भी इसी आधार पर होगी।


अभी नहीं बनाई हैं आयोग ने श्रेणियां


रोहिणी आयोग ने फिलहाल कोई श्रेणी नहीं बनाई है। कितनी श्रेणियां बनाना है, इस पर भी कोई फैसला नहीं लिया है। राज्यों से चर्चा के बाद ही इसका पूरा प्रारूप तय होगा। चूंकि राज्यों को इसे लागू करना है, ऐसे में उनकी राय जरूरी है।


कितनी जातियां है ओबीसी में


वर्तमान समय में देश में ओबीसी की करीब 26 सौ जातियां हैं, जिनके लिए नौकरियां और दाखिले में 27 फीसद का आरक्षण है। बावजूद इसके पूरा आरक्षण ओबीसी की छह सौ जातियों में ही बंट जाता है। इनमें भी करीब सौ ऐसी जातियां है, जो इसका आधे से ज्यादा लाभ ले जाती हैं। हालांकि इनकी जनसंख्या भी ज्यादा है।


विकास में पिछड़ी हैं कई ओबीसी जातियां


ओबीसी आरक्षण के बाद भी इसमें शामिल अनेक जातियां अभी भी विकास की दौड़ में पीछे हैं। ऐसे में सरकार ने वर्ष 2017 में जस्टिस जी.रोहिणी की अगुवाई में आयोग का गठन कर ऐसी जातियों को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण का उप-वर्गीकरण करने का फैसला लिया है। जस्टिस जी.रोहिणी दिल्ली हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रह चुकी हैं।


इन राज्यों में पहले से है ओबीसी का श्रेणीकरण


ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण देश के 11 राज्यों में पहले ही किया जा चुका है। हालांकि यह वर्गीकरण राज्य सूची के आधार पर किया गया है। जिन राज्यों में यह वर्गीकरण किया गया है, उनमें आंध्र प्रदेश, बंगाल, झारखंड, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी शामिल हैं।


आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक देश में कहीं भी पचास फीसदी से ज्यादा आरक्षण लागू नहीं हो सकता।


टीम स्टेट टुडे


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