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Paper leaked then life imprisonment, fine of one crore rupees will be imposed



पेपर लीक किया तो होगा आजीवन कारावास, एक करोड़ का लगेगा जुर्माना


प्रदेश में परीक्षाओं को पारदर्शी और शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए योगी सरकार ने उठाया एक और बड़ा कदम


सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक की रोकथाम 2024 अध्यादेश को योगी कैबिनेट ने प्रदान की मंजूरी


अध्यादेश के तहत पेपर लीक करने वालों को 2 साल से लेकर आजीवन कारावास तक के दंड का किया गया है प्राविधान


अध्यादेश के निर्धारित प्राविधानों का उल्लंघन करने वालों से वसूला जाएगा एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 44 प्रस्तावों में से 43 को मिली मंजूरी




लखनऊ, 25 जून। उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं को पारदर्शी और शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए योगी सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक की रोकथाम के लिए अध्यादेश को मंजूरी प्रदान की गई है। इस अध्यादेश के तहत उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सजा के कड़े प्राविधान सम्मिलित किए गए हैं, जिनमें 2 साल से लेकर आजीवन कारावास तक का दंड और एक करोड़ रुपए तक के जुर्माने को शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार पहले भी पेपर लीक जैसे मामलों पर कड़े कदम उठा चुकी है और अब इस अध्यादेश को इसी क्रम में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।


विभिन्न परीक्षाओं पर लागू होगा अध्यादेश


लोकभवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय मंत्री सुरेश खन्ना ने मंजूर किए गए प्रस्तावों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट के समक्ष कुल 44 प्रस्ताव रखे गए थे, जिसमें 43 को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है। अनुमोदित प्रस्तावों में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक रोकथाम अध्यादेश 2024 भी शामिल रहा। वित्त मंत्री ने बताया कि पेपर लीक के संबंध में मंत्रिपरिषद के द्वारा अध्यादेश के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है, जिसमें यदि कोई संस्था या उससे जुड़े लोग पकड़े जाएंगे तो उन्हें 2 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा और एक करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्राविधान किया गया है। उन्होंने बताया कि अध्यादेश के तहत लोकसेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड, उत्तर प्रदेश बोर्ड, विश्वविद्यालय, प्राधिकरण या निकाय या उनके द्वारा नामित संस्था भी इसमें सम्मिलित हैं। यह अध्यादेश किसी प्रकार की भर्ती परीक्षाओं, नियमितीकरण या पदोन्नती करने वाली परीक्षाएं, डिग्री-डिप्लोमा, प्रमाण पत्रों या शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं पर भी लागू होगा। इसके अंतर्गत फर्जी प्रश्नपत्र बांटना, फर्जी सेवायोजन वेबसाइट बनाना इत्यादि दंडनीय अपराध बनाए गए हैं। अधिनियम के प्राविधानों के उल्लंघन पर अध्यादेश के अंतर्गत दोषियों को 2 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा, जबकि एक करोड़ रुपए के जुर्माने का प्राविधान किया गया है।


सॉल्वर गिरोह से होगी नुकसान की भरपाई


उन्होंने बताया कि यदि परीक्षा प्रभावित होती है तो उस पर आने वाले वित्तीय भार को सॉल्वर गिरोह से वसूलने तथा परीक्षा में गड़बड़ी करने वाली संस्था तथा सेवा प्रदाताओं को सदैव के लिए ब्लैक लिस्ट करने का भी प्राविधान किया गया है। अधिनियम में अपराध की दशा में संपत्ति की कुर्की भी प्राविधानित की गई है। इसके तहत समस्त अपराध संज्ञेय, गैर जमानती एवं सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय एवं अशमनीय बनाए गए हैं। जमानत के संबंध में भी कठोर प्राविधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विधानसभा का सत्र न होने के कारण बिल के स्थान पर अध्यादेश का प्रस्ताव किया गया है। मंत्रिपरिषद के द्वारा प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद अध्यादेश की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा और इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।


तीन विकास प्राधिकरणों का किया गया सीमा विस्तार


योगी सरकार ने वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद विकासा प्राधिकरणों के विस्तार के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत इन विकास प्राधिकरणों में कई राजस्व गांवों को सम्मिलित किया गया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि तीन प्राधिकरणों के सीमा विस्तार का भी निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत वाराणसी विकास प्राधिकरण में 215 राजस्व गांव सम्मिलित किए गए हैं। वहीं बरेली विकास प्राधिकरण में भी 35 राजस्व गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में 71 राजस्व गांवों को सम्मिलित किया गया है।


अयोध्या में 750 करोड़ रुपए से भारतीय मंदिर संग्रहालय बनाएगा टाटा संस


प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि अयोध्या में टाटा संस अपने सीएसआर फंड से भारतीय मंदिर संग्रहालय का निर्माण कराएगा। इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से टाटा संस कुल 750 करोड़ रुपए खर्च करेगा। यह संग्रहाल विश्वस्तरीय होगा। उन्होंने बताया कि टाटा संस द्वारा एक प्रस्ताव भारत सरकार के माध्यम से प्राप्त हुआ था,जिसमें सीएसआर फंड से 650 करोड़ की लागत से वो एक विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहलाय बनाने का कार्य करेंगे। 650 करोड़ के साथ-साथ साइड के डेवलपमेंट में 100 करोड़ रुपए खर्च करेंगे। कुल मिलाकर 750 करोड़ रुपए से भारतीय मंदिर संग्रहालय के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इस मंदिर संग्रहालय के निर्माण का कार्य टाटा संस करेगा जबकि जमीन पर्यटन विभाग द्वारा एक रुपए की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह लीज 90+90 वर्ष के लिए होगी।



मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम को भी मिली मंजूरी


योगी कैबिनेट ने मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत पर्यटन विभाग शोधार्थियों का चयन करेगा जो प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ इस क्षेत्र में हो रहे निवेश को गति प्रदान करेंगे। साथ ही निवेशकों को आ रही समस्याओं को निस्तारित कराने में भी भूमिका निभाएंगे। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ये शोधार्थी पर्यटन विभाग से जुड़ी योजनाओं के पर्यवेक्षण, अनुश्रवण एवं पारिस्थितिकीय स्थलों के सर्वागीण विकास, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का मूल्यांकन, मेले व महोत्सव की योजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह शोधार्थी जिला पर्यटन और संस्कृति परिषद और विशेषकर पर्यटन निदेशालय के संरक्षण में अपना योगदान करके निवेशकों और पर्यटकों के अनुरूप माहौल बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे। फिलहाल 25 शोधार्थियों का चयन किया जाएगा। इन्हें मानदेय के रूप में कुल 40 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे, जिसमें पारिश्रमिक के रूप में 30 हजार रुपए और क्षेत्र भ्रमण के लिए 10 हजार रुपए मिलेंगे। साथ ही उन्हें एक टैबलेट भी प्रदान किया जाएगा।


 


2735 कृषि फीडर के जरिए किसानों को 10 घंटे मुफ्त बिजली दे रही योगी सरकार


अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने और कृषि कार्यों में उनकी मदद के लिए प्रतिबद्धता से जुटी प्रदेश सरकार


प्रदेश में 5 हजार से अधिक फीडरों को कृषि कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाना प्रस्तावित


पूरे प्रदेश में कुल 23226 फीडर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में की जा रही 24 घंटे बिजली आपूर्ति


14 लाख 21 हजार ट्यूबवेल धारक किसानों को दी जाती है फ्री बिजली


योगी कैबिनेट में लिए गए फैसले के अनुरूप कृषि फीडरों की संख्या बढ़ाने के लिए तेजी से हो रहा कार्य


लखनऊ, 25 जूनः अन्नदाता किसान सीएम योगी की प्राथमिकता में हैं। किसानों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन व उन्हें लागू करने पर उनका विशेष जोर रहता है। मार्च में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुई कैबिनेट मीटिंग में ट्यूबवेल से सिंचाई व कृषि कार्यों के लिए मुफ्त बिजली के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। वहीं बजट में भी योगी सरकार की ओर से मुफ्त सिंचाई के लिए 1100 करोड़ रुपये बजट की व्यवस्था की गई थी। इसे देखते हुए अप्रैल से किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा मिलने लगी है। योगी सरकार की ओर से कृषि कार्यों के लिए 2735 फीडर से 10 घंटे निःशुल्क बिजली दी जा रही है। जल्द ही कृषि फीडरों की संख्या 5 हजार से पार पहुंच जाएगी। गौरतलब है कि 14.21 लाख ट्यूबवेल धारक किसानों को फ्री बिजली दी जाती है।


5433 से अधिक फीडरों को कृषि कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाना प्रस्तावित

उत्तर प्रदेश में कुल 23226 विद्युत फीडर हैं। इसमें से 5433 से अधिक फीडर को कृषि कार्यों के लिए पृथक किया जाना प्रस्वावित है। इसमें से 2735 फीडर ऐसे हैं, जिन्हें कृषि कार्यों के लिए अलग किया जा चुका है और इनके माध्यम से सिंचाई व अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को 10 घंटे निशुल्क विद्युत आपूर्ति दी जा रही है। शेष 20491 फीडरों को बिना अलग किए फीडरों से 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है।


24 घंटे यूपी के ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में दी जा रही बिजली

भीषण गर्मी में भी यूपी में 24 घंटे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। सभी 75 जनपदों में समान रूप से बिजली देकर नागरिकों को सुविधाओं से पूर्ण रखा गया। वहीं आमजन को बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करने के अतिरिक्त कृषि कार्यों के लिए किसानों को भी योगी सरकार की तरफ से 10 घंटे बिजली दी जा रही है।


कृषि फीडरों के लिए तय लक्ष्य को निर्धारित समय में किया जाएगा पूर्ण

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप भीषण गर्मी के बावजूद पूरे प्रदेश में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इसी क्रम में अन्नदाता किसानों की बेहतरी के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस योजना को भी प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है। अनवरत मॉनीटरिंग के माध्यम से किसानों को सिंचाई समेत अन्य कृषि कार्यों के लिए 10 घंटे निःशुल्क विद्युत आपूर्ति प्रदान की जा रही है। प्रदेश सरकार की तरफ से कृषि फीडरों के लिए तय लक्ष्य को निर्धारित समय में पूर्ण कर लिया जाएगा।


 


बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस करेगी योगी सरकार


-सीएम योगी के विजन को क्रियान्वित करते हुए बुदेलखंड एक्सप्रेसवे को एटीएमएस समेत तमाम आधुनिक सुविधाओं से युक्त करने की प्रक्रिया हुई शुरू


-उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन (आरएफक्यू) माध्यम से मांगे हैं आवेदन


-एटीएमएस के संचालन के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट कमांड सेंटर की होगी स्थापना, कई अत्याधुनिक इक्विपमेंट्स से लैस किया जाएगा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे


-बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर 50 अलग-अलग लोकेशंस पर 150 वीआईडीएस युक्त सोलर चार्ज्ड 96 घंटे के बैकअप युक्त कैमेरों के इंस्टॉलेशन से आसान होगी निगरानी प्रक्रिया


लखनऊ, 25 जून। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए कृत संकल्प योगी सरकार प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लिए एक ओर जहां प्रदेश में निवेश लाने की प्रक्रियाओं पर जोर दे रही है, वहीं प्रदेश के एक्सप्रेसवेज को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने से एको ओर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में इजाफा हो रहा है वहीं प्रदेश में लॉजिस्टिक्स संबंधी मूवमेंट को भी सुरक्षित निगरानी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में सुधार हुआ है। इस क्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन अनुसार विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी और इसे क्रियान्वित करते हुए अब बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) से लैस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इस प्रक्रिया को क्रियान्वित करते हुए रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन (आरएफक्यू) व रिक्वेस्ट फॉर प्रजोजल (आरएफपी) माध्यम से आवेदन मांगे हैं।


कई एडवांस्ड फीचर्स से लैस होगा ट्रैफिक मैनेजमेंट कमांड सेंटर

बुंदलखंड एक्सप्रेसवे को आईटीएमएस इनेबल्ड बनाने के लिए जो कार्ययोजना तैयार की गई है उसके अनुसार बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक मैनेजमेंट कमांड सेंटर की स्थापना होगी। इसके जरिए ट्रैफिक मॉनिटरिंग व मैनेजमेंट प्रक्रिया को बल मिलेगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट कंट्रोल (टीएमसी) यूनिट को 360 टेराबाइट रिकॉर्डिंग सर्वर स्टोरेज से युक्त किया जाएगा। बैकअप रिकॉर्डिंग्स के लिए भी 240 टेराबाइट की रिकॉर्डिंग स्टोरेज सर्वर युक्त होगा।


एडवांस्ड ड्राइवर एडवायजरी सिस्टम से लैस किया जाएगा टीएमसी

टीएमसी यूनिट को फैसिलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम कंट्रोलर, ग्राफिक डिस्पले, इंटरनेट व एसएमएस सर्वर, फाइबर चैनल होस्ट व यूएसबी जॉयस्टिक कंट्रोल्ड पीटीजेड कैमरों से युक्त किया जाएगा। इमर्जेंसी टेलिफोन हेल्पलाइन कंसोल, स्टाफ के लिए आधार इनेबल्ड बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीन, सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस, लाइटनिंग प्रोटेक्शन यूनिट, एडवांस्ड ड्राइवर एडवायजरी सिस्टम, जीपीएस ट्रैकर समेत 890 कैमरों के संचालन के लिए वीएएमस लाइसेंस से युक्त किया जाएगा।


50 अलग-अलग लोकेशंस पर 150 वीआईडीएस युक्त सोलर पावर्ड कैमरे होंगे इंस्टॉल

मौजूदा प्रक्रिया में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को एटीएमएस इनेबल्ड बनाने के लिए अलग-अलग 50 लोकेशंस पर 150 वीआईडीएस इनेबल्ड कैमरे इंस्टॉल किए जाएंगे। यह कैमरे विशिष्ट होंगे और सोलर एनर्जी पावर्ड होने के साथ ही सिंगल चार्ज में 96 घंटे तक की ऑपरेशनल टाइमिंग होगी। योजना के अंतर्गत सीसीटीवी कंट्रोलर युक्त पीटीजेड कैमरों को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर इंस्टॉल किया जाएगा।


व्हीकल स्पीड डिटेक्शन सिस्टम करेगा ओवरस्पीडिंग गाड़ियों को मॉनिटर

मोशन डिटेक्शन सर्विलांस कैमेरा व व्हीकल स्पीड डिटेक्शन सिस्टम को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ इंस्टॉल किया जाएगा। इससे, ओवरस्पीडिंग करने वाली गाड़ियों के विषय में अलर्ट जारी हो सकेगा और कंट्रोल रूम द्वारा इसे तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा। इस क्रम में, 90 मीटर रेंज के स्पीड डिटेक्शन रडार भी प्रभावी सिद्ध होंगे जिनकी इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया भी साथ ही में पूर्ण की जाएगी तथा डिजिटल ट्रांसमिशन सिस्टम को भी क्रियान्वित किया जाएगा।


5 वर्ष की अवधि के लिए आवंटित होगा कार्य

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को एटीएमएस युक्त बनाने के लिए यूपीडा ने रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन (आरएफक्यू) व रिक्वेस्ट फॉर प्रजोजल (आरएफपी) माध्यम से आवेदन मांगे हैं। इस प्रक्रिया के जरिए नियुक्त होने वाली एजेंसी द्वारा ही इन सभी कार्यों को यूपीडा के अधिकारियों की देखरेख में पूरा किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यूपीडा द्वारा 5 वर्षों की कार्यावधि के लिए कार्य आवंटित होगा और चयनित एजेंसी को इन सभी इक्विप्मेंट्स की प्रोक्योरमेंट, इस्टॉलेशन, ऑपरेशन व मेंटिनेंस से संबंधित कार्यों को पूर्ण करना होगा। इसके अतिरिक्त यूपीडा स्टाफ को इसके संचालन के लिए ट्रेनिंग भी उपलब्ध करायी जाएगी। इस क्रम में, टेक्निकल स्टाफ व कंट्रोल रूम ऑपरेशन स्टाफ की नियुक्ति का कार्य भी एजेंसी द्वारा पूर्ण किया जाएगा।



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