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खाली हो भैया,,,चारबाग चलोगे,,,ठकपक ठकपक नियम से चलो



इक्का-तांगा-रिक्शा और कानून


लखनऊ की एक पहचान इक्का-तांगा की सवारी और साइकिल रिक्शा से सफर की भी है। रफ्तार पसंद जमाने में आधुनिक गाड़ियों ने भले अपनी जगह बना ली हो लेकिन इक्का-तांगा और साइकिल रिक्शा का क्रेज़ और जरुरत दोनों बरकरार है।


अक्सर रिक्शा, तांगा लखनऊ की सड़कों पर आपकी रफ्तार पर ब्रेक लगाते हैं, जाम लगता है और जल्दबाजी में दुर्घटनाएं भी होती हैं।



सड़क सुरक्षा को लेकर रोड सेफ्टी विंग अब नान मोटराइज्ड वाहन मसलन इक्का-तांगा, साइकिल-रिक्शा वालों के लिए नियम बनाने की तैयारी कर रहा है। अभी तक ऐसे वाहनों के लिए नियमावली में कोई प्रविधान नहीं है।

10 फरवरी को सड़क सुरक्षा से जुड़े पुलिस, लोनिवि, परिवहन, टाउन प्लानर, एनएचआइ समेत कई महकमों के जिम्मेदार और आइआइटी के विशेषज्ञ टिहरी कोठी स्थित परिवहन निगम के सभागार में जुटेंगे और सुरक्षित सफर के लिए बनाए जाने वाले नियमों पर मंथन करेंगे। रोड इंजीनियरिंग से जुड़े सभी दिग्गज अपना सुझाव देंगे।

हादसों में कमी लाने के लिए विशेषज्ञ गोष्ठी में तीन मुख्य बिंदुओं पर अपने विचार रखेंगे। सड़क सुरक्षा से जुड़े पुलिस अधिकारी मुकेश उत्तम बताते हैं कि पहला मसला सड़क निर्माण से जुड़ा होगा। इसमें सड़क के मानक, निर्धारित डिजाइन के अनुसार मार्ग का निर्माण सुनिश्चित कराए जाने की बात होगी। विशेषज्ञ अपने डेमो प्रदर्शित करेंगे।


दूसरा बिंदु उन लोगों की सुरक्षा से जुड़ा होगा जो नान मोटराइज्ड वाहन यानी ठेला, साइकिल, रिक्शा, इक्का तांगा का संचालन करते हैं। हादसे वाले स्थलों पर कहां पर फुट ओवरब्रिज बनाए जाएं और पैदल चलने वाले यात्रियों को सुरक्षा दिए जाने के लिए सड़क और चौराहों पर क्या-क्या सुविधाएं दी जानी चाहिए आदि पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।



मंथन के बाद नियम बनाए जाएंगे। कार्यशाला में देश भर के तमाम आइआइटी विशेषज्ञ को आमंत्रित किया गया है। इनमें यूपी की उन सड़कों के बारे में भी सुझाव मांगे जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर तीन से ज्यादा बार सड़क हादसे हुए हैं।


परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने बताया कि अभी तक नियमावली में सिर्फ मशीन से चलने वाले वाहनों के लिए नियम हैं। इनमें मानव द्वारा चलाए जाने वाले वाहन और पैदल चलने वालों के लिए ठोस नियम नहीं हैं। इसे लेकर आइआइटी समेत विषय विशेषज्ञों और वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ एक फोरम चर्चा कर नियम बनाए जाएंगे।



कई बार बेहतरीन कवायद भी सियासत के आगे दम तोड़ देती है। पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में प्रदेश के कई शहरों में साइकिल पथ बनाया गया था। करोड़ों रुपए खर्च किए गए। अगर साइकिल पथ को बनाते समय अधिकारियों ने थोड़ा ख्याल किया होता तो साइकिल रिक्शा और साइकिल के लिए ये मार्ग सबसे उपयुक्त होता। साइकिल पथ को बाकायदा छोटे पिलर्स से कवर किया गया था ताकि मोटरसाइकिल या अन्य तीव्रगति वाहन इस पर ना आ सकें। लेकिन ज्यादातर जगहों पर सरकार बदलते ही ना सिर्फ अतिक्रमण हुआ बल्कि कई जगहों पर पिलर तोड़ कर साइकिल पथ ही समाप्त कर दिए गए। ये काम आम नागरिकों ने किया। सरकार और प्रशासन का दोष इतना है कि उसने ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं की जिन्होंने सरकारी व्यवस्था को ध्वस्त किया।


टीम स्टेट टुडे


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