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इंस्पेक्टर देवेंद्र यादव के इस काम से अनजान तो नहीं है आप !



परिंदो को मंज़िल मिलेगी यकीनन ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं , वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं।


किसी शायर की ये पंक्तियां जिस शख्सियत के संबंध में की जा रही है उसके कंधों पर समाज की सुरक्षा का दारोमदार है, जी हां हम बात कर रहे हैं एंटी ह्युमन ट्रैफिकिंग यूनिट नोएडा के प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह की। देवेंद्र को हाल ही में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले द्वारा उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया तो उनके परिजनों से लेकर मित्रों और पुलिस विभाग के मित्रों ने बधाईयों का ढेर लगा दिया। देवेंद्र को ये सम्मान उनके द्वारा बाल कल्याण और भिक्षावृत्ति निवारण को लेकर उनके द्वारा चलाई जा रही ड्राइव को लेकर दिया गया है। पिछले दिनों देवेंद्र यादव चर्चा में तब आए थे जब उन्होंने सूरज नाम के बच्चे को उसके परिजनों से मिलवाया था जो सालों पहले बिहार के दानापुर में अपने परिजनों से बिछड़ गया था। सूरज के मिलने पर देवेंद्र ने ठान लिया कि उन्हें इस बच्चे से उसके परिवार वालों से मिलवाना ही है। बच्चे को उसके परिवार वालों से मिलवाने के लिए देवेंद्र ने दिन रात एक कर दिए और अपने सारे सूत्रों और संपर्कों को उसे बच्चे के परिजनों को ढूंढने में लगा दिया। देवेंद्र की कड़ी मेहनत और जज्बा एक बच्चे को अपने परिवार से मिलवाने में सफल रहा जो अपने बच्चे से दोबारा मिलने की उम्मीद ही खो चुका था।



इस घटना की सबसे मजेदार बात ये थी कि सूरज की गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दानापुर या आसपास के किसी पुलिस स्टेशन तक में दर्ज नहीं थी। ऐसे में सूरज के परिवार को ढूंढना कोई आसान टास्क नहीं था। देवेंद्र ने सूरज को उसके परिवार से मिलाने के लिए मीडिया से मदद मांगी तो तमाम मीडिया हाउसेस ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया और इसी के चलते ये खबर सूरज के परिवारवालों तक पहुंची और उन्होंने नोएडा में इस पूरे केस के हीरो देवेंद्र यादव से संपर्क किया। देवेंद्र ने वीडियो कॉल के माध्यम से सूरज के माता पिता से उसकी बात कराई तो दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया। देवेंद्र ने जिस लगन और शिद्दत के साथ एक बिछड़े हुए बच्चे को उसके परिवार से मिलवाया उसको देखकर हर कोई उनको पुलिस का असली दबंग और सिंघम कह रहा है। देवेंद्र आज तक जहां भी तैनात रहे अपनी कर्मठता और कार्यकुशलता के चलते अपने सहकर्मियों और सीनियर्स के चहेते बनकर रहे। देवेंद्र को पुरस्कार मिलने पर पुलिस विभाग से जुड़े तमाम लोगों ने खुशी जाहिर की है।


टीम स्टेट टुडे


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