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सेक्युलर भारत में अब मौलवियों से धार्मिक लामबंदी करवा रहा है यूपी पुलिस का निलंबित दरोगा



पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों की तरह उत्तर प्रदेश पुलिस मैनुअल की धज्जियां उड़ाने और वरिष्ठों के आदेश को नजरअंदाज कर दाढ़ी बढ़ाकर खाकी वर्दी का रौब गांठने वाले निलंबित दरोगा इंतेसार अली ने अब लामबंदी शुरु कर दी है।


नौकरी के उसूलों को ताक पर रख कर यूपी पुलिस में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाले निलंबित दरोगा इंतेसार अली के समर्थन में दारुल उलूम देवबंद के मौलवियों ने मोर्चा संभाला है। मौलवियों ने निलंबित दरोगा के समर्थन में उतरते हुए यूपी सरकार और प्रशासन पर बागपत के पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अभिषेक सिंह ने निलंबित दरोगा से दाढ़ी बढ़ाने के लिए कई बार विभाग से इजाजत लेने को कहा था। जिसे अली ने अनसुना कर दिया।


पुलिस मैनुअल के मुताबिक ड्यूटी ना करने सीनियर के निर्देशों का पालन ना करने पर एसपी ने दरोगा को निलंबित कर दिया था। अब सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई को ‘गलत’ करार देते हुए मौलवी एसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


आपको बता दें कि पुलिस मैनुअल में सिखों को छोड़कर किसी भी जवान को दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं है। अली को शेव करने या दाढ़ी रखने की अनुमति लेने के संबंध में तीन बार चेतावनी दी गई थी। हालांकि, पुलिसकर्मी ने अनुमति नहीं ली और दाढ़ी रखना जारी रखा।



इस पूरे प्रकरण में सबसे नुकसानदायक बात ये है कि अब तक धार्मिक जकड़ से दूर रही यूपी पुलिस के एक दरोगा ने धार्मिक कट्टरता या पहचान का जो बीज बोया है उसके दूरगामी परिणाम होंगे। सिर्फ यूपी पुलिस ही नहीं अगर किसी भी रुप में वर्दीधारी फोर्स इस कट्टरता की फांस में फंसी या सरकारों पर बेजा दबाव बनाया गया तो निश्चित रुप से धार्मिक उन्माद और विभेद को बढ़ावा मिलेगा।


इसलिए बेहतर होगा कि इंतेसार अली और उस जैसे किसी भी वर्दीधारी उसके बगावती तेवरों और शासन प्रशासन के खिलाफ धार्मिक लामबंदी के लिए तत्काल बर्खास्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। ताकि धर्मनिरपेक्ष भारत में इस तरह के उन्मादियों के लिए कोई जगह ना रहे।


टीम स्टेट टुडे


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