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गुरु कृपा से ही जीवन परमात्मा से जुड़ता है – देवेंद्र मोहन भैया


लखनऊ, 8 अक्टूबर 2023 : मनुष्य जीवन बहुत खास है। देवी-देवता भी मानव जन्म के लिए तरसते हैं। मनुष्य जीवन भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि आध्यात्म को कमाने के लिए है। शरीर की बड़ाई सत्य को जानने के लिए है। आधे से ज्यादा समय गुजर चुका है, जो कमाया उसे चले जाना है। इस संसार को एक चेतन धारा चला रही है। उस चेतन धारा को जीते जी जान लेना ही जीवन हैं। जीवन चेतना की यह अमृत धारा स्वामी दिव्यानंद जी महाराज के आध्यामिक उत्तराधिकारी देवेंद्र मोहन भैया जी के सत्संग में भक्तों पर खूब बरसी। आलमबाग स्थित बजरंग लॉन में देवेंद्र मोहन भैयाजी के सानिध्य में भव्य सत्संग एवं भंडारा हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में सत्संगियों ने हिस्सा लिया।

भैयाजी ने गुरु कृपा का महात्म बताते हुए कहा कि यह जीवन परमात्मा से जुड़ने के लिए है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए अंतर्मुखी साधना यानी अंतर साधना से जुड़ना जरूरी है। 24 घंटे बहिर्मुखी साधनों में रहने से हमें परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। बहिर्मुखी साधनों जैसे 2 मिनट दिया जलाना, 2 मिनट आंख बंद करके बैठना आसान है परंतु मन को एकाग्र करके बैठना मुश्किल है। संसार के कोई भी काम कीजिए तो माफ है लेकिन यदि हम खुद से नहीं जुड़े तो मनुष्य जीवन व्यर्थ है। संत का जन्म तो मानव को खुद से जोड़ने के लिए होता है। वही हमें मन को स्थिर करना और जीवन के सच्चे उद्देश्य से जोड़ने के लिए बताते हैं।


भैया जी ने कहा कि गुरु की शिक्षा से ही आत्मिक विकास होता है और हर मनुष्य के आत्मिक विकास से ही सामाजिक विकास भी सुनिश्चित होता है। हमें बताया जाता है कि हमें कुछ समय मौन रहना जरूरी है। आंख बंद करके बैठने पर जिस चीज का ख्याल ज्यादा आए तो समझ लेना चाहिए कि अभी हमारा प्रयास अधूरा है। हमें मन को एकाग्र करने के लिए अभी बहुत प्रयास की जरूरत है।

भक्तिभाव से भरे सत्संगियों के बीच स्वामी जी को याद करते हुए भैया जी ने कहा कि इस मन को भागने से रोकना है। इसके लिये प्रतिदिन जब हम गुरु पर भरोसा करके प्रयास करते हैं तब जाकर एकाग्रता आनी शुरू होती है। जीवन में गुरु पर भरोसा होना चाहिए। भरोसा करके गुरु नाम से जुड़ना चाहिए। उस पर भरोसा करने से हमें निर्भय पद प्राप्त होता है।

जीवन में संतों की संगत और सत्संग बहुत जरूरी है। कृपाल सिंह जी महाराज कहते थे- जब हम गुरु की शरण में आ जाते हैं तो भरोसा धीरे-धीरे बनना शुरू हो जाता है। गुरु से जुड़ने से ही जीवन का महत्व समझ आता है। गुरु के पास समय व्यतीत करने पर हम शुभ कार्य शुभ कर्म करते हैं। देवेंद्र मोहन भैया जी ने संगत को संकल्प कराया कि प्रतिदिन आधा घंटा ही प्रभु के आगे समर्पित होना है। ऐसा करने से हमारा भरोसा बढ़ता जाएगा। हमारे आध्यात्मिक कार्य से लेकर अन्य कार्य भी सुगमता से बनने लगेंगे। लखनऊ में भैयाजी के सत्संग आयोजन में समस्त साध संगत के साथ साथ दुर्गा प्रकाश रस्तोगी, राज कुमार शर्मा जी, पंकज जी, नागेंद्र भाई, पतंजलि जी, शिव कुमार जी, श्याम लाल,बृजेश भाई सेवादार भाई का योगदान रहा।

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