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खतरनाक इरादे से नाम बदल कर घुसे थे डासना के शिवधाम मंदिर में दो युवक यति नरसिम्हानंद से मिलने



गाजियाबाद के डासना शिवधाम मंदिर में नाम बदल कर घुसे संदिग्धों के इरादे बेहद खतरनाक थे।


आप को याद दिला दें कि कुछ समय पहले शिवधाम मंदिर में मूर्तियों पर एक मुस्लिम लड़के ने पेशाब किया था। जिसके बाद डासना मंदिर के महंत यति नरसिम्हानंद ने घटना पर ना सिर्फ गहरी नाराजगी जाहिर की थी बल्कि भविष्य के लिए मुस्लिमों को चेताया भी था।


इसके बाद मुसलमानों ने हर बार की तरह स्वामी यति नरसिम्हानंद के कत्ल का फतवा निकाल दिया।


अब स्वामी पर हमले का षडयंत्र रचा जा रहा है। बीस दिन में दूसरी बार यति पर हमले की कोशिश हुई है। 2 जून के मामले में भी आशंका जाहिर की जा रही है कि किसी गहरी साजिश के तहत ही ये दोनों युवक मना किए जाने के बावजूद डासना धाम में घुसे। मुस्लिम जेहादियों ने अपने कत्लोगारद के तरीके में परिवर्तन कर ऐसे युवकों का चुनाव किया है जिनका धर्म परिवर्तन करा कर उन्हें मुस्लिम बनाया गया है।


पकड़े गए दोनों युवकों के अलावा विजयनगर के एक व्यक्ति की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस उससे भी पूछताछ कर रही है। जानकारी के मुताबिक इसी युवक ने विपुल विजयवर्गीय की शादी मुस्लिम रीतिरिवाज से मोहम्मद कासिफ की बहन आयशा से एक मस्जिद में कराई थी। विपुल ने शादी धर्म बदलकर की थी। आयशा से हुए निकाहनामे पर विपुल का नाम रमजान उर्फ विजयवर्गीय है।



कासिफ ने नाम बदलकर जुटाई यति के बारे में जानकारी


खुफिया विभाग के सूत्रों के मुताबिक विपुल विजयवर्गीय काफी समय पहले विजयनगर निवासी एक मुस्लिम व्यक्ति के पास आकर रुका था। यह व्यक्ति चिकित्सा के पेशे से जुड़ा है और विजयनगर में ही उर्दू की तालीम देता है। विपुल और कासिफ की बहन ने यहां से ही पैरामेडिकल की पढ़ाई की और उर्दू की तालीम ली। सोमवार को भी विपुल इस व्यक्ति के पास जाकर रुका था। बुधवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे विपुल व कासिफ पुराना शहर स्थित एक किताब की दुकान पर पहुंचे। यहां से उन्होंने कुछ धार्मिक किताबें खरीदी और दुकान संचालक से यति के बारे में जानकारी ली और कहा कि आप क्या यति से हमारी मुलाकात कर सकते हैं।


आरोपितों ने खुद को दुकान संचालक के वाट्सएप ग्रुप पर भी जोड़ने के कहा। दुकान संचालक को कासिफ ने अपना नाम काशी गुप्ता ही बताया। जब दुकान संचालक के बेटे ने ट्रू-कॉलर पर चेक किया तो उसका नाम मोहम्मद कासिफ आया। इसके बाद कासिफ ने सफाई दी कि उसका नाम काशी गुप्ता ही है। यहां छह घंटे रुकने के बाद दोनों दिन ढलने के बाद करीब साढ़े छह बजे रवाना हुए। इस दौरान दोनों आरोपितों ने बताया कि उनकी महंत यति से मुलाकात होगी। इस पर दुकान संचालक ने उन्हें कुछ किताब देकर यति को भेंट करने के लिए कहा। मंदिर में आने से पहले इन लोगों ने एक वकील से भी बात की थी।


घटना को अंजाम देने वाले दिन दोनों युवक रात में करीब नौ बजे मंदिर में घुसे, जबकि वह गाजियाबाद शहर की एक किताब की दुकान पर छह घंटे तक वहां जाने की रणनीति बनाते रहे। मंदिर के प्रवेश द्वार पर यति नरसिंहानंद ने मुस्लिमों का मंदिर में प्रवेश वर्जित है का बोर्ड लगा रखा है। बावजूद इसके युवकों ने ना सिर्फ मंदिर में प्रवेश किया बल्कि पकड़े जाने पर अब कह रहे हैं कि ये स्वामी यति नरसिम्हानंद से शास्त्रार्थ करने आए थे।


सवाल जिनके जवाब मिलना बाकी हैं-

  • मंदिर के गेट पर बोर्ड लगा है कि यहां मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, इसके बाद भी उन्होंने मंदिर में प्रवेश क्यों किया?

  • मंदिर परिसर में घुसते समय पुलिसकर्मियों ने कहा कि महंत यदि मंदिर में नहीं हैं, इसके बाद भी वह मंदिर में क्यों घुसे?

  • विपुल ने रजिस्टर में अपनी एंट्री तो सही नाम से की लेकिन कासिफ का नाम काशी गुप्ता क्यों लिखा?

  • 27 मई से विपुल गाजियाबाद आया हुआ था और शहर में घूम रहा था, इसके बावजूद वह दिन में मंदिर क्यों नहीं आया, उसने मंदिर में आने के लिए रात का समय ही क्यों चुना?


दो जून को जब कासिफ और एक अन्य युवक मंदिर परिसर में पकड़े गए थे तो उनके पास से 3 सर्जिकल ब्लेड कुछ आपत्तिजनक दवाएं और साइनाइड बरामद हुआ था।


आपको यह भी बता दें कि गाजियाबाद के डासना इलाके में अक्सर धर्म परिवर्तन, लव जेहाद, अपराध और समुदाय विशेष की तरफ से सांप्रदायिक तनाव फैलाने की खबरें आती रहती हैं।


टीम स्टेट टुडे


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