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यूपी को बंगाल बनाने का ट्रायल शुरु – हिंदू परिवारों का पलायन और पुलिस दबिश तक सीमित



चुनाव के बाद हुई हिंसा में करीब दो लाख हिंदू आबादी को पश्चिम बंगाल से मुसलमानों ने बलात्कार, हत्या और आगजनी के दम पर निकाल दिया। ममता सरकार ने कोई एक्शन आज तक नहीं लिया। बंगाल की इन स्थितियों पर उत्तर प्रदेश के एक सियासी दल ने कहा कि 2022 में अगर हम चुनाव जीते तो उत्तर प्रदेश को बंगाल बना देंगें। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2022 का चुनाव अभी दूर है लेकिन यूपी को बंगाल बनाने का ट्रायल शुरु हो गया है।


पहले भी कैराना में हिंदू पलायन का मामला हुकुम सिंह के जीवित रहते उठा था। अब एक बार फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश में ऐसी स्थितियां बन रही हैं। मामूली बातों पर भी अब पुलिस या थाने तक मामला नहीं जाता। मुस्लिम माफिया सीधे हिंदू घरों पर मकान बिकाऊ है लिख कर चले जाते हैं और फिर हिंदू आबादी के बीच दहशत फैलाई जाती है।



मामला 26 मई की दोपहर अलीगढ़ के टप्पल में नूरपुर गांव के निवासी अनुसूचित जाति के ओमप्रकाश की दो बेटियों की बरात को चढ़ने से रोक दिया गया। ओमप्रकाश के अनुसार बरात चढ़त के साथ उनके दरवाजे पर आ रही थी। मुख्य मार्ग पर मस्जिद के पास मुसलमानों ने इकट्ठा होकर बरात चढ़त का विरोध किया। इस भीड़ ने बरातियों और गांव के हिंदुओं पर लाठी, डंडे व राड से हमला कर दिया।


जिसमें डीजे वाली गाड़ी के शीशे टूट गए। गाड़ी के चालक समेत दो लोग घायल हो गए। उन्होंने थाने में जानकारी देने के साथ ही अगली सुबह आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन थाना पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

सुरक्षा देने के नाम पर गांव में दो पुलिसकर्मी बिठा दिए।



गांव वालों ने आरोप लगाया कि मुस्लिमों की भीड़ ने सुनियोजित तरीके से बरात पर हमला किया था। पुलिस की कार्रवाई न होने से नाराज पीड़ित परिवार और उनके समर्थन में लोगों ने अपने दरवाजों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ लिखने के साथ ही रविवार की सुबह पुलिस व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। मामला बढ़ता देख रविवार की शाम को टप्पल पुलिस ने ओमप्रकाश पुत्र तेजपाल की तहरीर पर गांव के वकील, कलुआ, मुस्तकीम, सरफू, अंसार, सोहिल, फारुख, अमजद, तौफीक, सहजोर और लहरू के नाम रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार में जिस तरह का कारनामा मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजाम दिया गया है और उस पर पुलिस का जो रवैया है वो संदेह को गहराता है। इससे पहले भी कोरोनाकाल में एक मौलवी के जनाजे में जिस तरह बंदायू में कोविड गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा कर मुस्लिम समुदाय के लाखों लोग सड़कों पर आ गए वो भी सरकार और प्रशासन लिए गंभीर चेतावनी से कम नहीं था।

अब देखना होगा कि अलीगढ़ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में इस तरह के कारनामों पर सरकार और पुलिस प्रशासन क्या एक्शन लेती है।


टीम स्टेट टुडे


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