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लखीमपुर मामले में कांग्रेस का मैनेजमेंट भारी पड़ा योगी सरकार पर



तीन दशक से ज्यादा हुआ जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल हुई। बीते दशकों में कांग्रेस को ऐसा पॉलिटिकल माइलेज नहीं मिला जैसा लखीमपुर मामले में देखने को मिल रहा है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी का एहसास कराती रही लेकिन सरकार और सरकारी मशीनरी को चुनौती देने का मौका अर्से बाद आया।


लखीमपुर में आठ लोगों की मौत के बाद यूपी की सियासत गर्मा गई। किसान आंदोलन के नेता और राजनीतिक दलों में मरने वाले किसान परिवारों के पास पहुंचने की होड़ लगी। यूपी की योगी सरकार ने आनन-फानन में हिरासत और गिरफ्तारियों का जो सिलसिला शुरु किया उससे मामला बनने के बजाय और बिगड़ता चला गया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा कांग्रेस हाईलाइट हुई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी रविवार रात दिल्ली से लखनऊ पहुंचीं। रात में ही लखीमपुर के लिए निकल पड़ीं। सोमवार सुबह उन्हें सीतापुर में हिरासत में ले लिया गया। मंगलवार को उन्हें शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मंगलवार की शाम को ही राहुल गांधी ने लखनऊ आकर सीतापुर और फिर लखीमपुर जाने की बाद कही। बुधवार को राहुल के प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी होते ही योगी प्रशासन अलर्ट हुआ और लखीमपुर में धारा 144 लगी होने की बात कही गई।


बावजूद इसके राहुल लखनऊ आने और प्रियंका लखीमपुर जाने की मांग पर अड़ी रहीं।


योगी सरकार से तनातनी और प्रेस कांफ्रेंस के जरिए आरोप-प्रत्यारोप के बाद राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और पंजाब के सीएम चन्नी के साथ लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर कुछ देर की नोंकझोंक के बाद राहुल सीतापुर के लिए रवाना हो गए। जहां प्रियंका को साथ लेकर वो लखीमपुर रवाना हुए।



दो दिन से सीतापुर में नजरबंद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को राहुल गांधी के साथ तिकुनिया बवाल में मारे गए लवप्रीत के घर चौखड़ा फार्म पहुंचे। उन्होंने लवप्रीत के परिजन से मुलाकात की और न्याय का भरोसा दिलाया। इसके बाद वे लोग निघासन में मृतक पत्रकार रमन कश्यप के यहां भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी और उनके बेटे आशीष मिश्र की गिरफ्तारी की मांग की।


इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा लखीमपुर खीरी कांड में मृत पत्रकार मन कश्यप के घर पहुंचे । उन्होंने परिवारीजन से मुलाकात कर सांत्वना दी। इसके बाद धौरहरा के गांव रमनदीन पुरवा के शहीद किसान नक्षत्र सिंह के घर राहुल और प्रियंका जाएंगे। राहुल और प्रियंका का बहराइच भी जाने का कार्यक्रम है।

इस बीच राहुल के साथ आए पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने मृतकों के परिवार वालों को 50-50 लाख की मदद का ऐलान कर दिया।


राहुल और प्रियंका के बाद उत्तर प्रदेश में सक्रिय अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी पीड़ित परिवारों से मिलने की अनुमति मिल गई।


इस पूरे प्रकरण में ना सिर्फ प्रदेश की योगी सरकार की जमकर फजीहत हुई है बल्कि केंद्र सरकार के गृहराज्यमंत्री बड़ी किरकिरी का कारण बने हैं।



कहां-कहां चूकी योगी सरकार


योगी सरकार कांग्रेस के सधे हुए मैनेजमेंट के आगे बेबस नजर आई। ना सिर्फ राहुल और प्रियंका पीड़ित परिवारों से मिले बल्कि अब तक सख्त मिजाज मानी जाने वाली योगी सरकार का लचरपन भी जाहिर हो गया।

राहुल की प्रेस कांफ्रेंस के बाद योगी सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह की प्रेस कांफ्रेंस खबर तो बनी लेकिन सुर्खियां नहीं बन पाई। रही सही कसर राहुल ने लखनऊ आने के बाद लखीमपुर तक पहुंच कर पूरी कर दी।

योगी सरकार ने जिस तरह इस पूरे मामले को हैंडल किया उससे स्पष्ट है कि अफसरों के भरोसे बैठे योगी चुनाव से पहले अधिकारियों की उलटबासियों को समझ ही नहीं पाए।


उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी ने योगी से पहले अखिलेश और मायावती को भी नाकों चने चबवाएं हैं।


चुनाव से ठीक छ आठ महीना पहले अधिकारियों के भरोसे बैठी योगी सरकार और उपेक्षित कार्यकर्ताओं के साथ चल रही भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी विफलता तो ये है कि इस पूरे प्रकरण में उसके तीन समर्थक भी जान से हाथ धो बैठे। ये सब जानते हैं कि आंदोलनकारियों की भीड़ ने ही तीन अन्य लोगों की लाठी डंडों से पीटकर हत्या की है। बावजूद इसके पार्टी अपने समर्थकों के शव तक नहीं पहचान पाई।


उधर विपक्ष के निशाने पर चल रहे केंद्रीय राज्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने और केंद्र सरकार अपने मंत्री से इस्तीफा लेने में जिस तरह डील कर रही है उससे सरकार और बीजेपी के अंदरुनी मैनेजमेंट की फजीहत हो रही हैं।


टीम स्टेट टुडे



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