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कांवड़ यात्रा पर उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला



रिपोर्ट - आदेश शुक्ला


सावन के सोमवार पर गंगाजल से भोलेनाथ का जलाभिषेक भारतीय परंपरा का अकाट्य सत्य है। कांवड़िये बड़ी संख्या में हर साल गंगाजल लाकर शिवपूजन करते हैं। चूंकि ये दौर कोरोना महामारी का है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा को ना सिर्फ हरी झंडी दी थी बल्कि कोविड गाइडलाइंस के साथ प्रदेश में व्यापक तैयारियां भी आदेशित थीं। परंतु सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद राज्य सरकार ने कांवड़ संघों से बातचीत समाधान निकाला है।


सरकार अपनी तरफ से कांवड़ यात्रा को रोकना नहीं चाहती थी। सरकार से बातचीत के बाद संघों ने खुद ही कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया है। सावन के महीने में धार्मिक परंपरा के अनुसार 25 जुलाई से कांवड़ यात्रा प्रस्तावित थी।


इससे पहले उत्तराखंड सरकार कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी थी लेकिन योगी सरकार ने इसके लिए सशर्त अनुमति दीथी।


सरकार का आदेश था कि कांवडिय़ों के लिए आरटीपीसीआर की नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य होगी। साथ ही कांवड़ संघों से अपील की गई कि कम से कम श्रद्धालु यात्रा में शामिल हों।


इसमें भी दोराय नहीं है कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप अभी कम हुआ है खत्म नहीं। इस बीच तीसरी लहर का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यूपी सरकार ना सिर्फ धर्मसंकट में फंसी बल्कि जनहानि और कोरोना संक्रमण को हर हाल में रोकना उसकी प्रथम प्राथमिकता रही है।


कई राज्यों में डेल्टा प्लस मामले बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर यूपी सरकार को नोटिस जारी कर दिया। चूंकि मुख्यमंत्री योगी खुद यात्रा को स्थगित नहीं करना चाहते थे और अदालत का आदेश का भी सम्मान होना था इसलिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कांवड़ संघों से बात की जाए। कोरोना संक्रमण बढऩे की आशंका का पक्ष रखें। सरकार और अदालत की चिंता और मंशा का सही आंकलन कर कांवड़ संघों ने यात्रा को स्थगित करने का फैसला लिया। आपको बताते चलें कि कोरोना के प्रकोप के कारण ही पिछले वर्ष भी कांवड़ यात्रा नहीं निकल सकी थी।


इसके बाद कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के चलते अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कांवड़ संघों से अपील की है कि वह इस बार कांवड़ यात्रा पर नहीं निकालें।


हांलाकि परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और महामंत्री हरि गिरि ने शिव भक्तों से निवेदन किया है कि अपने गांव के शिवालयों में गंगाजल का अभिषेक करें या फिर अपने घरों में शिवलिंग की स्थापना करके गंगाजल का अभिषेक करें।

सावन के महीने में कांवड़ यात्रा की परंपरा बरसों पुरानी है। लगातार दूसरे साल यात्रा ना हो पाने के चलते भक्तों में थोड़ी निराशा तो है लेकिन शिवभक्त महामारी के दौर की गंभीरता को भी समझ रहे हैं।


टीम स्टेट टुडे


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