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क्यों वापस लिए पीएम मोदी ने कृषि कानून और आगे क्या करने वाले हैं !



तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देश के साथ उत्तर प्रदेश में विपक्ष भाजपा की सरकार पर बेहद मुखर था। इसके साथ ही विपक्ष ने उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा के चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने की बड़ी योजना भी बना ली थी।


इसी बीच किसी को भी जरा सी खबर नहीं थी कि पीएम नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संदेश में इतनी बड़ी घोषणा कर देंगे। इससे पहले भी केन्द्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार ने पेट्रोल तथा डीजल के दाम में भारी कमी करके लोगों को बढ़ी महंगाई से थोड़ी राहत देने का प्रयास किया था। इसके साथ ही इससे पहले पेट्रोल डीजल के दाम घटाकर भी सरकार ने महंगाई को लेकर विपक्ष के हमले को ठंडा किया था।



सिर्फ इतना ही नहीं विपक्ष जिस जमीन पर अपनी राजनीति की बिसात बिछा रहा था वो जमीन ही कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के साथ पीएम मोदी ने सरका दी। दूसरी तरफ ये भी सच है कि कानून वापस लेने के ऐलान के साथ ही विपक्ष सरकार पर ना सिर्फ हमलावर है बल्कि आंदोलन के दौरान जिन किसानों की मौत हुई उनके जरिए अपनी राजनीति का रास्ता बनाए रखने की भरसक कोशिश भी कर रहा है।


हांलाकि कानून वापस लेने भर से बीजेपी का नुकसान पूरा हो जाएगा ऐसा नहीं है लेकिन वो अब पलट कर पब्लिक से पूछ सकती है कि अब क्यों रुठे हो। गलती ही सही जो हुई थी वो सुधार दी अब तो मान जाओ।


29 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा 'एसकेएम' ने एलान किया था कि 29 नवंबर से संसद सत्र के अंत तक 500 चयनित किसान, ट्रैक्टर ट्रॉलियों में रोजाना शांतिपूर्ण और पूरे अनुशासन के साथ संसद भवन तक पहुंचेंगे। किसानों को दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, ये बात तय थी। इससे किसान आंदोलन उग्र हो उठता, जिसका नतीजा अच्छा नहीं मिलता।


खुफिया रिपोर्ट ने किसान आंदोलन की आड़ में देश के भीतर रचे जा रहे षडयंत्र की रिपोर्ट सरकार को दी है। 26 जनवरी को दिल्ली में किसान आंदोलन के नाम पर जितनी हिंसा हुई उससे कहीं ज्यादा हिंसा और अराजकता की स्थिति उन पांच राज्यों में बनने जा रही थी जहां चुनाव होने हैं। किसान आंदोलन में 'लट्ठ, काला कपड़ा व खुफिया रिपोर्ट' ने नेताओं को संभलकर चलने के लिए मजबूर कर दिया।


किसान संगठनों ने चार-पांच माह पहले ही स्पष्ट तौर पर यह बात कह दी थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के मंत्रियों और पदाधिकारियों का घेराव किया जाएगा। इस बात पर अमल भी शुरू हो गया था। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखाए गए।



संसद में कैसे वापस होंगे कानून


किसी कानून में जो भी संशोधन होता है, उसे कानून मंत्रालय संबंधित मंत्रालय को भेजता है। इस मामले में कृषि मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद उस संबंधित मंत्रालय के मंत्री संसद में बिल पेश करेंगे। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए भी सरकार को संसद में बिल पेश करना होगा। संसद में बिल पेश होने के बाद उस पर बहस होगी और फिर वोटिंग।


‘‘जब कोई निरस्तीकरण विधेयक पारित किया जाता है, तो वह भी कानून होता है।’’ उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून लागू नहीं किए गए थे, लेकिन वे संसद द्वारा पारित कानून हैं, जिन्हें राष्ट्रपति की अनुमति मिली है और उन्हें संसद द्वारा ही निरस्त किया जा सकता है।


सरकार तीनों कृषि कानूनों को एक निरस्तीकरण विधेयक के जरिए निरस्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि विधेयक के उद्देश्य एवं कारण संबंधी वक्तव्य में सरकार यह कारण बता सकती है, वह तीनों कानूनों को निरस्त क्यों करना चाहती है।


टीम स्टेट टुडे



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