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कोरोना वैक्सीनेशन का आंकड़ा 100 करोड़ हुआ कैसे ?



ये सच है कि भारत ने दुनिया में 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन लगाकर इतिहास रच दिया। दुनिया के कई विकसित देश जिसमें अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया और यूरोप के तमाम देश शामिल है 25 से 40 करोड़ अधिकतम जनसंख्या वाले ये देश अब तक अपने सभी नागरिकों को वैक्सीन की डोज नहीं दे पाए हैं।


सिर्फ नौ महीने में 100 करोड़ वैक्सीनेशन का आंकड़ा पार करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का लोहा दुनिया ने मान लिया है। सिर्फ इतना ही नहीं भारत के प्रधानमंत्री, भारत की सरकार, भारत के सभी राज्यों की सरकारें और बाकी दुनिया ने भारत के डाक्टरों, नर्सों और वैक्सीनेशन अभियान में शामिल उन हजारों स्वास्थ्य कर्मियों , कोरोना वारियर्स का लोहा माना है जो इस अभियान में शामिल हैं।


सियासी साजिशों से सफलता के शिखर तक


भारत में हर मामला सियासी होता है। महामारी के दौर में जहां एक तरफ लोगों की जान जा रही थी तो दूसरी तरफ सियासत भी पूरे चरम पर थी। जनवरी में जब वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को आरंभ किया गया उसी समय में पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान भारत के सियासी दलों ने ही लगा दिए। सिर्फ इतना ही नहीं नेताओं और सियासी दलों ने तो यहां तक कह दिया कि ये वैक्सीन बीजेपी की है हम तभी लगवाएंगे जब हमारी सरकार बनेगी। भारत में सिर्फ वैक्सीनेशन का आंकड़ा सौ करोड़ तक पहुंचा यही इतिहास नहीं है पहली बार भारत ने दुनिया के देशों को कड़ी टक्कर देते हुए कोरोना काल की चुनौतियां का सामना करते हुए भारत में ही कोविड वैक्सीन बना ली ये भी इतिहास हो चुका है।



बात सिर्फ सियासी होती तो भी गनीमत रहती, हर मामले का फटा बताकर अदालत भागने वालों ने भी वैक्सीनेशन पर अदालती दखल लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।


इन सबके बीच मोदी की अगुवाई में चल रही भारत सरकार ने ना सिर्फ अदालत को शांत बैठने का आग्रह किया बल्कि सियासी दलों की आपत्तियों और आरोपों की परवाह ना करते हुए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को टॉप गियर में लाने में देर नहीं की।


चरणबद्ध तरीके से पहले कोरोना वारियर्स , फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लगाने के बाद बीमार बुजुर्गो फिर 45 साल तक की उम्र वालों को और फिर 18 साल से ऊपर सभी को वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।

अप्रैल महीने में पूरी तरह केंद्रीयकृत टीकाकरण अभियान भी मुद्दा बना और इसमें राज्यों व निजी क्षेत्र की भागीदारी की मांग उठने लगी। कई राज्यों ने टीकों के लिए विदेशी कंपनियों को आर्डर भी देना शुरू कर दिया ताकि वह स्वतंत्र रूप से टीकाकरण अभियान चला सकें।


इसे देखते हुए सरकार ने मई महीने से 25-25 फीसद टीके राज्यों और निजी क्षेत्र के लिए सुरक्षित कर दिए। लेकिन एक महीने के भीतर ही राज्यों के अधीन टीकाकरण अभियान अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ने लगा और 21 जून से केंद्र ने उनके हिस्से के टीके भी खुद लगाने का फैसला किया।


दुनिया में कोरोना की लगने वाली कुल 700 करोड़ डोज की 15 प्रतिशत अकेले भारत में लगी हैं।



गर्व की बात ये भी है कि भारत ने अपने नागरिकों के टीकाकरण के साथ-साथ लगभग 5.5 करोड़ डोज दूसरे देशों को भी दी हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि 100 करोड़ में 97 करोड़ से अधिक डोज लोगों को मुफ्त में दी गईं और केवल तीन फीसद ही निजी क्षेत्र के मार्फत लगी हैं। इसमें भी निजी क्षेत्र को मुनाफा वसूली की इजाजत नहीं दी गई।


टीकों के लिए बुनियादी ढांचे और कच्चे माल आदि की उपलब्धता की राह तो मुश्किल थी ही, बार-बार उठते रहे राजनीतिक विवादों ने कठिनाई और बढ़ा दी। 279 दिनों में हासिल की गई उपलब्धि की शुरुआत 16 जनवरी को सिर्फ हेल्थ केयर वर्कर्स के टीकाकरण के साथ हुई थी।



टीकाकरण अभियान की खास बातें

16 जनवरी को शुरू हुआ अभियान
एक मई से सभी वयस्कों के लिए खुला
97 करोड़ से अधिक डोज मुफ्त लगीं
5.5 करोड़ डोज दूसरे देशों को भी दीं
स्वदेश निर्मित टीकों से हासिल की सफलता
दिसंबर तक होना है सभी वयस्कों का टीकाकरण


इसके साथ ही सरकार ने साफ कर दिया कि टीकों की आपूर्ति के लिए वह विदेशी कंपनियों की क्षतिपूर्ति जैसी शर्तों के आगे नहीं झुकेगी। आखिरकार जून में सरकार ने साफ किया कि वह 31 दिसंबर तक देश में सभी वयस्कों के टीकाकरण के लिए तैयार है और इसके लिए उसने टीकों की उपलब्धता का रोडमैप भी सामने रखा।


भारत में निर्मित कोविशील्ड और कोवैक्सीन की जोड़ी


टीकाकरण की यह उपलब्धि भारत में निर्मित सिर्फ दो टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सीन द्वारा हासिल की गई है। इनमें लगभग 88 करोड़ डोज कोविशील्ड और 12 करोड़ कोवैक्सीन की हैं। दूसरे डोज की उपलब्धता नहीं होने के कारण स्पुतनिक-वी टीकाकरण अभियान का हिस्सा नहीं बन सका।


कोरोना वैक्सीन के 100 करोड़ डोज पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से बात की। यहां पीएम मोदी के सामने ही बनारस के दिव्यांग अरुण रॉय को 100 करोड़वां डोज लगाया गया है।


टीम स्टेट टुडे



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