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वो चेहरे आप भूले तो नहीं जो कोरोनाकाल में मददगार थे! कृतज्ञ है शहर जिन योद्धाओं का उनका है सम्मान



कोरोना की तीसरी लहर का खतरा हर दिन के साथ बढ़ रहा है। केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों के साथ साथ आम जनता से अपील कर रही है कि कोविड गाइडलाइंस का पालन करें। अगले दो तीन महीने तीसरी लहर के खतरे के लिहाज से बहुत गंभीर है। इसके बाद भी खतरा बना रहेगा अगर लोगों ने सावधानी ना बरती।


कष्ट और जीवन भर की असहनीय पीड़ा कोरोना की दूसरी लहर में लगभग हर घर ने झेली है। जब लोग अस्पताल, दवा, आक्सीजन के लिए जूझ रहे थे तब कुछ कर्मयोगी ऐसे थे जिन्होंने सेवाभाव से निस्वार्थ लोगों की मदद की। सिर्फ जिंदा लोग ही नहीं जो लोग इस दुनिया से महाप्रयाण कर गए उनके लिए भी ये योद्धा डटे रहे। संक्रमण के डर से कई लोगों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी बाधित हो रही थी ऐसे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कई सेवादार ऐसे थे जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह ना करते हुए जन जन की भरसक मदद की।


समय बीता, लॉकडाउन से अनलॉक का दौर शुरु हुआ, जीवन धीरे धीरे ही सही गतिमान हुआ तो शायद लोगों की स्मृति से ऐसे मददगार, कोरोनाकाल के वीर और महान सेवादारों की याद धुंधली सी पड़ने लगी। चूंकि सेवा निस्वार्थ भाव से थी इसलिए ये कोरोनाकाल के योद्धा भी अपने महान कार्यों को नेकी कर दरिया में डाल की भावना से आगे बढ़ गए।


लेकिन लखनऊ शहर और यहां के जीवट जन इतने कृतघ्न भी नहीं कि विपत्तिकाल की कृतज्ञता का सम्मान ना करें। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासी और भारतीय जनता पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते आए अभिजात मिश्रा निकल पड़े ऐसे कर्मयोगियों के सम्मान के लिए।


कोरोना की दूसरी लहर में अभिजात मिश्रा स्वयं कोरोनाग्रस्त थे। प्रभु की कृपा और आम जन के प्रार्थनाओं से वो स्वस्थ हुए तो निकल पड़े कोरोना वारियर्स के सम्मान के लिए।



इस क्रम में अभिजात मिश्रा पहुंचे लखनऊ मनकामेश्वर वार्ड के पूर्व पार्षद रणजीत सिंह यादव जी के घर। जिनका जीवन सदैव सेवा कार्य में समर्पित रहा है ।अपने वार्ड की स्वच्छता हो या गोमती नदी की स्वच्छता। पूरे लखनऊ महानगर में हर जरूरतमंद के लिये सदैव खड़े रहने वाले कोरोना काल मे तो आप ने सेवा कार्य करने की एक बड़ी मिसाल खड़ी कर दी है।



आप लगभग 14 माह के कोरोना काल से अनवरत सेवा कार्य करते आ रहे है,जिसके कारण आप स्वयं भी कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित हुए व स्वस्थ होने के उपरांत आप पुनः तत्काल राशन वितरण, कम्युनिटी किचन,स्वक्षता,व ऑक्सीजन उपलब्ध कराने आदि कार्यो से ले कर कोरोना महामारी से जिन लोगों का देहांत हुआ उनकी अंतेष्टि हेतु उनके पार्थिव शरीर को शमशाम स्थल में पहुँचाने का कार्य भी पूरी तत्परता से करते रहें।




ये आलोक पांडे जी हैं। जिन्होंने कोरोना काल की पहली लहर से लोगों को के लिये राशन वितरण , किचन कमनुटी, स्वक्षता कार्य किये । कोरोना काल मे अपने पिता जी व अपने ताऊ जी के निधन हो जाने के बावजूद सेवा कार्य करते रहे। कोरोना काल की दूसरी लहार में लगभग 400 लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराया ।



भारतीय जनता युवा मोर्चा लखनऊ के पश्चिम मंडल अध्यक्ष अभिषेक गुप्ता जी और इनकी टीम करुनेश पाठक , अतुल सिंह , अनिल मिश्रा , सनी साहू , हिमांशु शुक्ला , रमेश त्रिपाठी , जय गुप्ता , विनीत दीक्षित , राघव कुमार , पीयूष पांडे ने मृतकों को घर से ले कर घाट तक पूरा विधि विधान से अन्तिम संस्कार का कार्यक्रम करने के बाद उन्हें सम्मानजनक विदाई दे कर अगले दिन उनकी अस्थि भी माँ गोमती में प्रवाह करने का काम किया।



गरीब व निर्धन परिवार की अंत्येष्टि का सारा खर्चा भी इन्हीं की टीम ने वहन किया।



लंबे समय से राशन वितरण, रक्तदान व सेनेटाइजिंग का सेवा कार्य भी निरंतर चलाते रहे।




ये अंकित पांडे जी हैं। कोरोनाकाल में अंकित और उनकी टीम ने वृहद सेवाकार्य किए। राशन वितरण से लेकर जन जन की हर संभव मदद करने में ये टीम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही।




सामाजिक कार्यकर्ता श्री अरुण प्रताप सिंह जी ने कोरोना काल में लोगों में राशन वितरण व चार माह तक कम्युनिटी किचेन चलाया।



इस दौरान खुद भी कोरोना से संक्रमित हुए मगर इनके हौसले बुलंद थे कोरोना को हराने के बाद पुनः जनसेवा में जुट गये ।